भोपाल.छठ पूजा के अवसर पर राजधानी में तालाब संरक्षण के लिए एक नया प्रयोग हुआ। बड़े तालाब स्थित शीतलदास की बगिया पर गोबर, दलिया और दाल से निर्मित 5300 दीपक प्रवाहित किए गए। यह दीपक पानी में तैर रहे थे। बाद में यह दीपक तालाब की मछलियों के लिए भोजन का काम करेंगे। आम तौर पर तालाब में दीपक प्रवाहित करने के लिए थर्माकोल या एेसे ही किसी मटेरियल से बने दोने इस्तेमाल किए जाते हैं, जो तालाब के लिए नुकसानदायक साबित होते हैं। यह दीपक नरसिंहपुर जेल के कैदी बना रहे हैं।
नगर निगम ने बड़े तालाब में प्लास्टिक डालने पर रोक लगा दी है, लेकिन छठ पूजा के अवसर पर परंपरा को देखते हुए इसे रोकना संभव नहीं था। लेकिन राजधानी की गो काष्ठ संवर्धन एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के प्रयास से इसमें काफी कमी आई है।
कई प्रयासों के बाद ये दीपक बनाने में सफलता मिली
समिति के तकनीकी सहयोग से नरसिंहपुर जेल में गो काष्ठ (गोबर से लकड़ी) बनाने की मशीन स्थापित की गई है। इसके बाद एक स्थानीय किसान ने गोबर से दीपक बनाने की मशीन बनाई। नरसिंहपुर जेल की अधीक्षक शैफाली तिवारी ने बताया कि गो काष्ठ समिति के सदस्य सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. योगेंद्र कुमार सक्सेना के सहयोग से कई प्रयासों के बाद दीपक बनाने में सफलता मिली। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में दीपक बनाने का काम शुरू हुआ। गोकाष्ठ समिति के अध्यक्ष अरुण चौधरी, डॉ. योगेंद्र कुमार सक्सेना, हेमंत अजमेरा और प्रमोद चुघ आदि ने शनिवार को शीतलदास की बगिया पर 5300 दीपक वितरित किए।
इन दीपक में दाल और दलिया का उपयोग किए जाने से यह पानी में डूबने के बाद मछलियों के लिए भोजन का काम करेंगे। उल्लेखनीय है कि समिति राजधानी के विभिन्न विश्रामघाटों में अंतिम संस्कार के लिए गो काष्ठ उपलब्ध करा रही हैै। गो काष्ठ से अंतिम संस्कार से पेड़ों की कटाई में कमी आएगी।
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