नासिया नाका सोसायटी खरीद केंद्र पर किसानों की गेहूं की फसल कई दिनों तक न खरीदे जाने से परेशान किसानों से तुलाई के नाम पर टायर की मिट्टी के 25 किलो तौल कम नापने और एक ट्राली में 30 किलो मिट्टी के वजन काटने से आक्रोशित किसानों ने रविवार को एबी रोड पर जाम लगा दिया। ऊपर से फसल खरीदी में देरी से सब्र खो रहे किसानों से कनासिया सोसायटी के सेक्रेटरी द्वारा अभद्रता की गई। तेज गर्मी से परेशान किसान आक्रोशित हो गए। देखते ही देखते किसान हाइवे पर पहुंचे और जाम लगा दिया। किसानों की समस्या की खबर लगते ही जब क्षेत्र के विधायक पहुंचे तो मामला और बढ़ गया। करीब दो घंटे तक जाम के बाद प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा के बाद मामला शांत हुआ।
ज्ञात रहे पहले किसानों ने कनासिया नाका स्थित पुराने एबी रोड पर जाम लगाने की कोशिश की, लेकिन जब वहां बात नहीं बनी तो सैकड़ों किसान अपनी ट्रॉलियां लेकर बायपास के मुहाने पर पहुंच गए। यहां किसानों ने हाइवे के दोनों ओर 8 ट्रैक्टर ट्रॉलियों से हाइवे जाम कर दिया। कुछ ही देर में एबी रोड के दोनों ओर 7 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। जाम में कुछ एंबुलेंस भी फंस गई जिन्हें किसानों ने मानवता दिखाते हुए रास्ता दिया। किसानों का कहना था कि वे दस दिनों से केंद्र पर खड़े हैं। फसल नहीं खरीदी जा रही। केंद्र पर लेनदेन करके तौल कर ली जाती है। जो किसान रुपए नहीं देते उनकी फसल नहीं खरीदी जा रही। तौल में भी सोसायटी वाले गड़बड़ी कर रहे हैं और हमारे रोकने पर सोसायटी का सेक्रेटरी अभद्रता करता है।
तराना विधायक बैठे धरने पर, सूचना पर आधे घटे बाद पहुंची पुलिस
किसानों द्वारा जाम की सूचना मिलते ही तराना विधायक महेश परमार भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ एबी रोड पर पहुंच गए और हाइवे पर किसानों की समस्या को लेकर धरने पर बैठ गए। विधायक ने किसानों के साथ नाइंसाफी और परेशान करने का आरोप शिवराज सरकार पर लगाया। जाम लगने के 2 घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंचे तराना एसडीएम गोविंद दुबे ने किसानों की समस्या सुनकर उसे हर हाल में हल करने का आश्वासन दिया। एसडीएम के आश्वासन के बाद नाराज किसानों ने जाम खोल दिया।
महिला ने विधायक और अधिकारियों को सुनाई खरी खोटी-हाइवे पर लगे 7 किलोमीटर में लंबे जाम में हजारों छोटे-बड़े वाहन फंस गए । चिलचिलाती धूप में सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और महिलाओं को उठानी पड़ी। जिस वक्त किसानों का एबी रोड पर धरना चल रहा था उस समय तराना एसडीएम गोविंद दुबे किसानों और विधायक की समस्या सुन रहे थे तभी जाम में अपने बच्चों के साथ फंसी दो महिलाएं वहां पहुंच गई। महिलाओं ने विधायक और वहां खड़े अधिकारियों को जाम की वजह से हो रही परेशानी ओर सोशल डिस्टेंसिंग का मजाक बनाने पर खरी खोटी सुना दी। इसके बाद विधायक और अधिकारी तुरंत वहां से उठकर चलते बने।हाइवे पर जाम लगने की सूचना मिलने पर हाइवे से 1.5 किलोमीटर दूर स्थित मक्सी थाने से बल को आने में आधा घंटा लग गया। घटना स्थल पर भी पुलिस आक्रोशित किसानों को समझाने के बजाए मूकदर्शक बनकर देखती रही। किसान मदनलाल मालवीय, बघेरक के किसान प्रेम सिंह, कनासिया के मनोज, गोलवा के जितेंद्र आदि किसान आक्रोशित थे। इनका कहना था कि शिवराज सरकार में किसानों की कोई नहीं सुन रहा। केंद्रों पर पीने के पानी तक के इंतजाम नहीं किए गए। वे गर्मी की तेज धूप में ट्रॉली लेकर फसल बेचने आए हैं। उन्हें 24 तारीख को केंद्र पर आने का मैसेज आया था, लेकिन तब से लेकर आज तक उनकी फसल नहीं खरीदी जा सकी है। ऊपर से सोसायटी प्रबंधन द्वारा ट्राली की मिट्टी और गेहूं की मिट्टी के नाम पर 50 से 60 किलो गेहूं कम तौला जा रहा है, जबकि ऐसा कोई नियम सरकार ने नहीं बनाया है।
अधिकारियों ने यह दिया तर्क- गोविंद दुबे, एसडीएम तराना का कहना है
कनासिया सोसायटी पर मिट्टी के नाम पर कम उपज तौलने को लेकर कुछ किसान आक्रोशित हो गए थे जिसे सोसायटी केंद्र पर मिट्टी के नाम पर वजन कम नहीं करने के निर्देश दिए है। किसानों की सभी समस्याओं को हल किया जा रहा है। अभद्रता के मामले की जांच की जाएगी।
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