पांच दिन पहले 29 अगस्त को नर्मदा के ऊपरी क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद इंदिरा सागर व ओंकारेश्वर बांध के गेट साढ़े 10 मीटर तक खोलने से आई बाढ़ का पानी मोरटक्का के पुल के ऊपर से गुजरने की वजह से उसे बंद कर दिया गया। चार दिन बाद 1 सितंबर को जब पानी उतरा तो वर्ष 1952 में बने मोरटक्का पुल की सड़क उखड़ी व रेलिंग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। नर्मदा का जलस्तर धीरे-धीरे सामान्य हुआ तो 2 सितंबर गुरुवार को एनएचएआई व एमपीआरडीसी के अफसरों की टीम पुल का निरीक्षण करने पहुंची। उन्होंने पुल के ऊपर व नीचे देखा और फिलहाल 10 दिन तक पुल पर से आवागमन बंद रहने के संकेत दिए हैं।
बुधवार को नेशनल हाईवे अथोरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर मनीष असाटी व एमपीआरडीसी के संभागीय मैनेजर इंदौर राकेश जैन की संयुक्त टीम ने करीब दो घंटे तक पुल का निरीक्षण किया। दिल्ली से ब्रिज एक्सपर्ट पंकज राय भी पुल पर पैदल भ्रमण कर टूटी हुई रेलिंग देखी। यहां उन्होंने देखा कि बाढ़ के कारण पुल पर जगह-जगह डामर के पैच नजर आ रहे थे। करीब 6 से 8 इंच के डामर के टुकड़े सतह लेवल से उखड़ चुके थे। स्पान (पुल के नीचे दो पिल्लरों के बीच की गोलाई) का निरीक्षण करने के लिए सभी अधिकारी नाव से पुल के नीचे जाना चाहते थे लेकिन जलस्तर सामान्य से अधिक होने के कारण निरीक्षण नहीं कर पाए। इसके बावजूद नावघाट खेड़ी के नर्मदा तट पर पहुंचकर पुल के दो पिलर के बीच बने स्पान के निचले हिस्से को देखा। दोपहर 2 बजे शुरू हुआ निरीक्षण शाम 4 बजे तक चला लेकिन इसके बाद भी पुल कब तक शुरू होगा इसके बारे में नहीं बता पाए। आगामी कुछ दिनों में एक जांच दल और यहां आएगा, जो पूरे पुल व उसके स्ट्रक्चरल सेफ्टी की जांच करेगा।
जांच रिपोर्ट के बाद पता चलेगी पुल की स्थिति
दिल्ली से आए ब्रिज एक्सपर्ट पंकज राय के अनुसार पुल की विस्तृत जांच बेहद जरूरी है। यहां मिली जानकारी के अनुसार ब्रिज कई बाढ़ व हैवी ट्रैफिक झेल चुका है। वर्तमान में पुल की क्या स्थिति है वो सिर्फ जांच के बाद ही पता चल पाएगी। जांच रिपोर्ट तैयार करने में कम से कम 10 दिन का समय लग सकता है। ऐसे में आवश्यक है कि हमें पुल पर आवागमन शुरू करने से पहले रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ेगा। भले ही पुल आपको को प्रत्यक्ष रूप से अच्छी स्थिति में नजर आ रहा हो लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से पुल में क्या समस्याएं हो सकती है। वो तो जांच रिपोर्ट में ही पता चलेगा। पुल उम्र करीब 68 साल हो गई है।
दरार के बीच क्रांकीट मजबूत या बाढ़ में बहा, ये देखना जरूरी- एक्सपर्ट
नावघाट खेड़ी के नर्मदा तट पर बने पुल के पिलर के ठीक ऊपर अधिकारियों को एक दरार नजर आई, जो करीब दो फुट लंबी थी। इसे देखकर उन्होंने कुछ देर तक आपस में चर्चा की। मोबाइल से फोटो लिए। दरार पहले की है या अभी की, ये तो स्पष्ट नहीं हुआ लेकिन अधिकारियों की चिंता इस बात की है कि सामने से भले ही दरार सुरक्षित लगे लेकिन अंदर दरार के बीच में कांक्रीट मजबूत है या बाढ़ के पानी के साथ बह गया है। यह देखना जरूरी है। इसकी जांच भी की जाएगी। जांच दल एक बार और मोरटक्का पुल पर आएगा। दोबारा जांच के बाद पुल की मरम्मत का कार्य शुरू हो जाएगा।
बुजुर्ग पुल... 68 साल हो गई उम्र
- 1952 में मोरटक्का पुल का निर्माण हुआ था।
- 780 मीटर कुल लंबाई है पुल की ।
- 24 पिल्लरों के सहारे खड़ा है मोरटक्का पुल।
- 06 मीटर कुल चौड़ाई है पुल की
इंदिरा सागर से प्रति सेकंड 30 हजार क्यूमेक्स पानी छाेड़ा, हाईलेवल ब्रिज क्षतिग्रस्त, सतवास-पुनासा रोड बंद
परियोजना प्रबंधक ने कहा ब्रिज के सुधार बाद परिवहन दोबारा शुरू किया जाएगा
खंडवा | इंदिरा सागर बांध परियोजना के प्रबंधक ने बुधवार से डैम के डाउन स्ट्रीम में बने हाईलेवल ब्रिज से आवागमन पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया। परियोजना प्रबंधक ने बताया बांध के रेडियल गेट से 30 हजार क्यूमेक्स पानी छोड़ा गया। जो हाई लेवल ब्रिज के नीचे गुजरा। बांध के ऊपर क्षेत्र में बारिश होने से अधिक पानी की आवक हुई है।
बांध का वॉटर लेवल मेनटेन करने के लिए लगातार पानी छोड़ा गया। अत: बाढ़ निकासी के दौरान जन सुरक्षा को ध्यान में रखकर पुल पर परिवहन को प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही जल निकासी के दौरान पुल के किनारों एवं आसपास मिट्टी का कटाव देखा गया था। बांध से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा में कमी होने के बाद पुल पर से परिवहन शुरू करने से पहले संभावित क्षति का आंकलन संयुक्त टीम द्वारा बुधवार के किया गया। टीम द्वारा निरीक्षण में पाया गया कि पुल से वर्तमान समय में परिवहन पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाए। परियोजना द्वारा आवश्यक सुधार के बाद दोबारा आवागमन शुरू किया जाएगा।
वैकल्पिक मार्ग खातेगांव, हरदा-खंडवा मार्ग से जाएंगे वाहन
कलेक्टर अनय द्विवेदी ने कन्नौद- सतवास-पुनासा मार्ग पर वाहनों के आवागमन को प्रतिबंधित करने के आदेश जारी किए हैं। मार्ग से आवागमन प्रतिबंधित करने की स्थिति में वाहन वैकल्पिक मार्ग कन्नोद से खातेगांव, हरदा-खंडवा मार्ग तथा कन्नोद से इंदौर का उपयोग करेंगे। वहीं कन्नोद से खातेगांव, हरदा-खंडवा मार्ग तथा कन्नोद से इंदौर के लिए मार्ग का उपयोग किया जा सकेगा। आदेश का पालन न करने पर संबंधित के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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