प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैशलेस इंडिया की हकीकत शहर के बीचों-बीच स्थित चरक डायग्नोसिस में देखी जा सकती है। यहाँ न तो क्रेडिट और डेबिट कार्ड स्वाइप करने वाली मशीन है और न ही आजकल गाँव-गाँव उपयोग में आ रहे यूपीआई से पेमेंट लिया जाता है।
अगर किसी मरीज या उसके परिजन के पास कैश न हो तो आपातकाल में भी उसका सीटी स्कैन नहीं हो सकता भले ही वो बड़े बैलेन्स वाला कार्ड क्यों न रखा हो। मध्यरात्रि के बाद अपने परिजन के चेस्ट का सीटी स्कैन कराने पहुँचे एक सम्भ्रांत नागरिक से मॉडल रोड स्थित चरक डायग्नोसिस में जमकर बदतमीजी की गई। कारण था, मरीज के परिजन द्वारा स्वाइप मशीन के बारे में पूछ लेना।
वहाँ कैश काउंटर पर मौजूद अधेड़ कर्मी ने अभद्रता करते हुए न केवल कैश की माँग की, बल्कि यह तक कह दिया कि सेंटर के मालिक का सीधा कहना है कि कैश ही लो, और उसके बिना स्कैन न करो। इस कर्मी की हठधर्मिता का ये आलम था कि उसने परिजन का ये अनुरोध भी ठुकरा दिया कि 3 हजार रुपए लेकर स्कैन चालू करो, बाकी 2800 एटीएम से निकालकर ला रहा हूँ। उसने कहा कि जब पूरे कैश पैसे दोगे तभी मरीज को मशीन में ले जाया जाएगा।
इस बीच पहले से ही घुटन का अनुभव कर रहे मरीज की धड़कन भी बढ़ गई। यह उल्लेखनीय है कि बाकी सेंटर्स में इसी स्कैन के 2400 रुपए लगते हैं, जिसके चरक में करीब ढाई गुना ज्यादा 5800 रुपए लिए गए। एक अन्य मरीज को तो स्कैन के बाद कह दिया कि फिल्म और रिपोर्ट कल दोपहर में मिलेगी। ज्यादा पैसे देकर भी इस तरह के अभद्र व्यवहार की अनेक शिकायतें चरक डायग्नोसिस के खिलाफ लगातार आ रही हैं।
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