रेलवे, एयरपोर्ट, पेट्रोलियम कंपनी भारत की अन्य नवरत्न कंपनियां, बैंकों को निजी कंपनियों को बेचा जा रहा है। इससे अनुसूचित जाति जनजाति अन्य पिछड़ा वर्गों में असंतोष है। इसे लेकर मप्र अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ अजाक्स ने राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निजीकरण के प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। संघ के जिलाध्यक्ष प्रेम कोठारे ने बताया निजी ठेकेदार कंपनियां आम आदमी का शोषण करेंगे और देश की आर्थिक बागडोर निजी हाथों में चली जाएगी। निजीकरण कोई समाधान नहीं है, निजीकरण खुद एक समस्या है। ज्ञापन सौंपते समय संभागीय पदाधिकारी केबी मंसारे, यूके गोयल, महेश मांडले, आनंद सावनेर, संतोष गवई, मुकेश मुहारे, विजय खंडेल, नवल दर्सिम्हा, चैतराम नीलकंठ, सत्यनारायण चौहान, संजय कनारे, गुलाब कटियारे, त्रिलोक मंसारे, राजेन्द्र देवलिया, मनोज ओसवाल, स्वतंत्र धारसे, विश्वनाथ हरियाले सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
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