राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) के नतीजे घाेषित हाेते ही शहर के शिवाजी नगर स्थित शासकीय सुभाष एक्सीलेंस स्कूल में खुशी की लहर दाैड़ गई। इसकी वजह यह है कि इस परीक्षा के जरिए स्कूल के 9 विद्यार्थियाें काे मेडिकल काॅलेजाें में प्रवेश मिल सकेगा। इनमें से 3 विद्यार्थी ऐसे हैं, जिन्हाेंने विषम परिस्थतियाें एवं आर्थिक तंगी के बावजूद इसमें कामयाबी हासिल की। प्राचार्य सुधाकर पाराशर ने बताया कि 12वीं कक्षा की पढ़ाई के साथ नीट की तैयारी करते हुए इन विद्यार्थियाें ने पहले ही प्रयास में सफलता पाई।
मोबाइल से रहे दूर
चिमनी के उजाले में की पढ़ाई
मम्मी मुन्नी बाई पढ़ी नहीं हैं। पापा कालू सिंह 8वीं तक पढ़े हैं। महज दाे एकड़ जमीन में कपास, मक्का लगाकर गुजारा करते हैं। राेज 17 किमी उमरबन गांव में स्कूल जाना पड़ता था। यह सिलसिला 3 साल कक्षा 6वीं, 7वीं और 8वीं की पढ़ाई के लिए चला। अब नीट के जरिए डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए चयन हाे गया है। गांव में 24 में से 4 या 5 घंटे ही बिजली मिलती थी।
रात काे चिमनी के उजाले में पढ़ाई करना पड़ता था। हाॅस्टल में 10 से 12 घंटे तक पढ़ाई की। माेबाइल फाेन का बिलकुल इस्तेमाल नहीं किया। संघर्ष की यह कहानी है धार जिले के धरमपुरी तहसील के छितरी गांव के छात्र मिलन मंडलाेई की है। मिलन भाेपाल के सुभाष एक्सीलेंस स्कूल की कक्षा 12वीं का विद्यार्थी है।
पढ़ाई के लिए घर छोड़ा
मम्मी-पापा की बदौलत यहां पहुंचा
संघर्ष की दूसरी कहानी सतना निवासी छात्र प्रिंस नामदेव की है। प्रिंस ने बताया कि मम्मी कृष्णा 8वीं पास हैं, जबकि पापा भगवानदास 10वीं तक पढ़े हैं। दाेनाें कपड़ों की सिलाई करके परिवार की गुजर-बसर करते हैं। पन्ना के महेबा गांव में घर और तीन एकड़ खेत छाेड़कर पापा 4 भाई-बहनाें की पढ़ाई की खातिर सतना चले आए। यहां छाेटे से किराए के मकान में रहकर पढ़ाई की। मम्मी काे एक ब्लाउज की सिलाई के एवज में महज 5 रुपए मिलते थे। दोनों थोड़े-थोड़े पैसे जोड़कर फीस जमा करके हमारी तरक्की में बड़ा योगदान दिया। उन्हीं की बदौलत आज मैं इस मुकाम तक पहुंचा हूं।
रोज 10 घंटे पढ़ाई
खानदान में पहला डॉक्टर बनूंगा
यह कहानी विदिशा के पास पुरा दुकाड़िया गांव के अनस खान की है। गांव में 5 एकड़ जमीन है। इसी पर पापा रहीम खान खेती करके गुजारा करते हैं। हम लोगं 3 भाई, 3 बहन हैं। अनस ने कहा कि गांव में आठ-आठ दिन तक बिजली नहीं रहती थी। बैटरी से उजाला करके 10 घंटे पढ़ता था। अब खानदान में मैं पहला डाॅक्टर बनूंगा। अनस के पापा रहीम खान 5वी कक्षा पास हैं, जबकि मम्मी सितारा बी स्कूल ही नहीं गईं। कभी-कभी ऐसा भी हो जाता था कि भाई-बहनों को घर में पढ़ाई करने की जगह तक नहीं मिल पाती थी, इस कारण खेत पर जाकर हम लोग पढ़ाई करते थे।
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