माता पिता के व्यक्तिगत आचरण का असर बच्चों पर जरूर नजर आता है। बच्चेे सहज ही अनुकरणशील होते हैं, वे जैसा माता पिता को करते देखते हैं, वैसी ही सीख लेते हैं। अपना रहन-सहन, आचार- विचार और स्वभाव उनके अनुकूल रखना चाहिए, जिस आदर्श में वह अपने बच्चों को ढालना चाहता है। मुनि प्रतीक सागर महाराज ने यह बात कही। वह धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पिता स्वार्थी, क्रोधी, कर्कश, और व्यसनी, विलासी होता है, वह न तो आदर का पात्र होता है और न उसके बच्चे ही अच्छे बन पाते हैं। माता के आचरण का प्रभाव कन्याओं पर विशेष रूप से पड़ता है। जो माताएं अधिक साज-सज्जा, शृंगार और गहनों में रुचि रखती हैं और सास, ननद, देवरानी, जेठानी आदि से लड़ती-झगड़ती हैं, उनकी कन्याएं भी फैशनेबल, छबीली और विलासप्रियता की शिकार बन जाती हैं और उनके स्वभाव में भी विवाद, असहयोग और कलह के अंकुर उग आते हैं। माता-पिता को चाहिए कि परिवार के सारे सदस्यों तथा व्यक्तियों से यथायोग्य प्रेम और आदर का व्यवहार करें सबके लिये त्याग तथा उदार भावना को प्रश्रय दें, अधिक से अधिक सादगी और शालीनता से रहें, इससे उनके बच्चों पर पारिवारिकता के अनुकूल प्रतिक्रया होगी। वे प्रेमभाव की मिठास और त्याग का महत्व समझेंगे।
केशलोच समारोह कल: चातुर्मास समिति के प्रचार मंत्री सचिन जैन ने बताया कि प्रतीक सागर महाराज के मार्गदर्शन एवं सानिध्य में अहिंसा महारैली एवं केशलोच समारोह 4 अक्टूबर को सोनागिर सिद्धक्षेत्र आयोजित होगा। कार्यक्रम में आचार्य आदर्श सागर महाराज, आचार्य धर्म भूषण महाराज, एवं आर्यिका कीर्ति मति, आर्यिका प्रसन्न मति आदि मौजूद रहेंगी। प्रचार मंत्री ने बताया कि भगवान महावीर स्वामी के संदेश को जन जन तक पहुंचाने हेतु इस अहिंसा रैली का प्रारंभ प्रातः 8:45 बजे होगा। जिसमें 10 वर्ष से लेकर 15 वर्ष तक के बच्चे गांधी वेशभूषा में तथा श्रावक श्राविका है सफेद वस्त्र और केसरिया वस्त्रों में सम्मिलित होंगे।
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