घर और बाजार से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन शुरू होने व शहर को डस्टबिन फ्री करने के बाद बाजारों और मुख्य मार्गों पर लगाए गए लिटर बिन्स गंदगी के नए स्पॉट बन गए हैं। ज्यादातर लिटर बिन्स के ढक्कन टूटे हुए हैं। कई जगहों पर तो नीले और हरे में से एक गायब ही है। आवारा जानवर इनका कचरा बिखेर देते हैं। कई जगहों पर तो जानवरों ने इन बिन को तोड़ भी दिया है।
शहर में लगे लिटर बिन्स के रखरखाव का कोई सिस्टम ही नहीं है, यानी बिन का ढक्कन या स्टैंड टूटा है तो उसे कौन ठीक कराएगा? यदि कोई एक बिन पूरी तरह खराब हो गई है तो उसे कौन बदलवाएगा? नगर निगम का सफाई अमला भी आते-जाते इन लिटर बिन्स की स्थिति को देख कर अपने वरिष्ठ अफसरों को जानकारी नहीं देता, क्योंकि सीधे तौर पर यह किसी की जिम्मेदारी नहीं है।
हालात ऐसे कि...कई जगह बिन तो कई जगह पर ढक्कन हो गए गायब
सुरक्षा के इंतजाम ही नहीं
शहर में बाजारों और मुख्य मार्गों पर कुल 750 लिटर बिन्स लगे हुए हैं। देखरेख के अभाव में इनमें से ज्यादातर खराब हो गईं हैं। इन लीटर बिन को जानवरों से बचाने के लिए या सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
सेग्रीेगेशन भी नहीं... कहने के लिए सूखे और गीले कचरे के लिए नीले और हरे बिन लगे हैं, लेकिन इनमें सेग्रीगेशन नहीं होता। यदि राहगीर अलग-अलग कचरा डालें, तब भी इसका मिक्स होना तय है, क्योंकि सड़क से कचरा उठाने वाली गाड़ियों में नगर निगम ने सेग्रीगेशन का इंतजाम नहीं किया है।
^लिटर बिन्स खराब हो गए हैं। सार्वजनिक स्थानों पर लगने वाले इन लिटर बिन्स का खराब होना स्वाभाविक है। हम इन्हें रिपेयर करा रहे हैं। -वीएस चौधरी कोलसानी, आयुक्त, नगर निगम भोपाल
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