त्योहार के बाद अब दूसरे शहरों में नौकरी करने वाले काम पर जाने लगे हैं। दूसरे शहरों से आने वाले कर्मचारियों से 48 घंटे तक की आरटीपीसीआर टेस्ट की कोरोना निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य की गई है। दो दिन के अवकाश के बाद विक्टोरिया की फीवर क्लीनिक में मंगलवार को बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की भीड़ रही। यहाँ पर्ची बनवाने के लिए ही लंबी कतार थी, वहीं अधिकांश की आरटीपीसीआर जाँच की माँग से वहाँ का स्टाफ भी परेशान हुआ। यहाँ सेना के जवानों की भी खासी भीड़ रही।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा एंटीजन व आरटीपीसीआर टेस्ट को समान रूप से कराया जा रहा है। ऐसे में यदि आरटीपीसीआर टेस्ट अधिक होते हैं तो मेडिकल काॅलेज की लैब पर वेटिंग बढ़ती है। बहरहाल नौकरी पर वापस जाने वालों को इस टेस्ट की सुविधा दिए जाने के लिए फीवर क्लीनिक स्टाफ को मौखिक रूप से कहा गया।
प्रमाणित रिपोर्ट ही मान्य
कोरोना टेस्टिंग के लिए लाइन में लगे लोगों ने बताया कि अधिकारियों ने दूसरे शहर से आने वाले कर्मचारियों के लिए 48 घंटे के अंदर की निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य की है। यह रिपोर्ट शासकीय चिकित्सक द्वारा प्रमाणित होनी भी जरूरी है, यही कारण है कि निजी पैथाेलॉजी में भी कोविड जाँच की सुविधा होने के बाद भी वे फीवर क्लीनिक में आने मजबूर हैं।
जिपं सीईओ पॉजिटिव - जिला पंचायत सीईओ मंगलवार को कोरोना पॉजिटिव आए हैं। तबियत खराब होने पर उन्होंने कोरोना टेस्ट कराया था।
एड्स रोगी को जल्दी घेरती हैं दूसरी बीमारियाँ
जबलपुर। एड्स संक्रमण नियमित उपचार के अभाव में जानलेवा होता है। मुख्यत: असुरक्षित यौन संबंध व संक्रमित सिरिंज व नशे के वक्त लिए जाने वाले इंजेक्शन से यह बीमारी फैलती है। एड्स संक्रमित मरीज को टीबी व अन्य फंगल इंफेक्शन जल्दी होता है जो बाद में ठीक नहीं होता। इससे बचने के लिए सतर्कता ही बेहतर उपचार है।
एक दिसंबर मंगलवार को विश्व एड्स दिवस के मौके पर जिला अस्पताल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन तथा जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा सम्मिलित रूप से जागरूकता कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी। सिविल सर्जन डॉ. सीबी अरोरा, आईएमए जिला शाखा अध्यक्ष डॉ. दीपक साहू, जिला एड्स नियंत्रण अधिकारी डॉ. धीरज दवंडे आदि कार्यक्रम में उपस्थित थे।
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