भोपाल .ये हैं रागिनी श्रीवास्तव। पेशे से सरकारी वकील हैं और अब नेशनल तैराकी प्रतियोगिता में मप्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। एक लड़की की जान बचाने के लिए सांड से भिड़ गईं 48 वर्षीय रागिनी पिछले तीन साल से दर्द से जूझ रही थीं। फिटनेस के लिए कुछ माह पहले तैराकी सीखी। अब वे 16वीं मास्टर्स नेशनल एक्वेटिक चैंपियनशिप में मप्र का प्रतिधिनित्व कर रही हैं। रागिनी ने यहां 100 मीटर ब्रेस्ट स्ट्रोक में पांचवा स्थान हासिल किया है।
दिखाया हौसला... लड़की को बचाने के लिए दो सांडों से भिड़ीं, हुए मल्टीपल फ्रैक्चर
21 जनवरी 2016 की सुबह की बात है। रागिनी अयोध्या बायपास चौराहे पर ऑटो का इंतजार कर रही थीं। तभी एक महिला और उसकी 14 वर्षीय बेटी सड़क पर लड़ रहे दो सांडों की चपेट में अा गईं। रागिनी हाथ में एक लकड़ी लेकर सांड़ों से भिड़ गईं और सांडों के पैरों के बीच गिरी लड़की को बचा लिया, लेकिन सांड ने उनपर हमला कर दिया। उन्हें जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है।
तीन साल तक दर्द से जूझीं, चलने-फिरने के लिए लेना पड़ता था वॉकर का सहारा
रागिनी के दाएं पैर में मल्टीपल फ्रेक्चर हुए थे। प्लास्टर हटने के बाद उन्हें ऑफिस ज्वाइन करना पड़ा लेकिन डॉक्टर ने ज्यादा चलने-फिरने से मना किया था। वे वॉकर के सहारे ऑफिस जाती थी। कम चलने-फिरने से वजन भी बढ़ गया और पैर पर ज्यादा जोर पड़ने लगा। वजन कम करने के लिए मार्च 2019 ने तैराकी शुरू की। इसी बीच तरण पुष्कर में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता हुईं। यहां तैराकों से मिलने के बाद जुनून बढ़ गया। कोच संदीप बाथम ने सपोर्ट किया और रागिनी का चयन लखनऊ में 18 से 20 अक्टूबर तक हुई प्रतियोगिता के लिए हो गया।
हमेशा बेहतर करने का प्रयास करती हैं रागिनी :जिस उम्र में लोग तैराकी सीखने में कई महीने लगा देते हैं। उस उम्र में रागिनी शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। वे एक दिन भी सीखना मिस नहीं करती हैं और हमेशा बेहतर करने का प्रयास करती हैं।
संदीप बाथम , कोच तरण पुष्कर
रागिनी बहुत मेहनती है। यह मास्टर्स की प्रतियोगिता है, जिसमें 35 प्लस के खिलाड़ी ही भाग लेते हैं। । रागिनी ने 100 मीटर ब्रेस्ट स्ट्रोक में 5वां स्थान प्राप्त किया है।
रामकुमार खिलरानी, सचिव भोपाल तैराकी संघ
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