जनसेवा कल्याण समिति के माध्यम से बुधवार काे रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में गलवान घाटी में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को रक्तदान कर श्रद्धांजलि दी। इस शिविर में 135 लाेगाेें ने रक्तदान िकया। इसमें 9 महिलाएं थीं, जिनमें गृहणी के अलावा महिला पुलिस अधिकारी, आरक्षक शामिल थीं। शिविर में अतिथि के रूप में जिला शिक्षा अधिकारी लखनलाल सुनारिया, जिला परियोजना समन्वयक सुबोध शर्मा, ब्लड बैंक अधिकारी डॉ. अंकिता सीते, शैलेन्द्र बिहारिया मौजूद थे। इस माैके पर सुनारिया ने कहा वीर शहीदों को लहू से श्रद्धांंजलि देना अभिनव पहल है। यह रक्त जरूरतमंदों के काम आएगा। उन्हाेंने कहा कि कई अनुसंधानाें के बावजूद हम रक्त का कोई विकल्प नहीं ढूंढ पाए हैं। रक्त की आपूर्ति केवल रक्तदान से हो सकती है। उन्होंने सभी रक्तवीरों का अभिवादन किया।
शर्मा ने कहा बलिदान से बड़ी कोई आराधना हो ही नहीं सकती और रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं होता। बिहारिया ने शहीदों पर कविता सुनाई। उन्हाेंने कहा कि जिसे सींचा लहू से है, वो यूं ही खो नहीं सकती, सियासत चाहकर हरगिज विषबीज बो नहीं सकती, वतन के नाम पर जीना, वतन के नाम मर जाना, शहादत से बड़ी कोई इबादत हो नहीं सकती।
पहली बार इतनी संख्या में रक्तदान संभवत: यह पहला माैका था, जब चीन बाॅर्डर पर शहीद हुए जवानाें काे श्रद्धांजलि देने पहुंचे लाेगाें ने बढ़-चढ़कर रक्तदान िकया। इसमें 9 महिलाएं शामिल हुईं। शिविर के अंत तक 135 लोग रक्तदान कर चुके थे, जाे आमाला का एक रिकाॅर्ड है।
सुरक्षा का रखा ध्यान
शिविर में विभिन्न संस्थाओं के लाेगाेें ने रक्तदान किया। इस माैके पर कुछ लाेग परिवार समेत पहुंचे थे। पुलिस विभाग से महिला अधिकारी, महिला आरक्षक ने भी रक्तदान किया। शिविर में सुरक्षा व्यवस्था का भी ध्यान रखा। प्रत्येक रक्तदान के बाद बैड काे सैनिटाइज किया। इसके अलावा साेशल डिस्टेंसिंग का पालन किया।
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