साल भर हुई बारिश के कारण बीते पांच सालों में इस साल जिले का औसत भूजलस्तर गर्मी में भी सबसे अच्छा रहा। गत पांच सालों में गर्मी में मई के अंत में पूरे जिले का भूजलस्तर 80 फीट से नीचे चला जाता था, मई 2019 में जाे 92 फीट के नीचे पहुंच गया था। लेकिन इस साल मई के अंत में भी 70 फीट पर ही पर्याप्त पानी मिलता रहा। वहीं जो बांध पिछले साल मई के पहले ही सूख जाते थे इस साल उन सभी बांधों में अब भी 50 अरब लीटर पानी स्टोर है।
इधर पिछले साल जहां 1597 हैंडपंप वाटर लेवल नीचे जाने से बंद हो गए थे, इस साल केवल 467 हैंडपंप ही बंद हुए हैं। लॉकडाउन में पानी की खपत बढ़ जाने और जमकर पानी का इस्तेमाल होने के बावजूद इस साल जलसंकट के हालात नहीं बने। जबकि इस बार शहर में पानी की खपत तीन सालों में 67 लाख लीटर से बढ़कर 1 करोड़ लीटर रोज हो गई है। पिछले साल शहर में चार दिन के अंतराल से पानी की सप्लाई हाेती थी, वहीं इस साल राेज पानी सप्लाई किया जा रहा है। संक्रमण से बचने के लिए जिले में लोग बार-बार नहाने और हाथ धोने के लिए पानी का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। बावजूद इसके पानी पर्याप्त है।
इस साल सबसे ज्यादा पानी हुआ सप्लाई
2018 में माचना एनीकट में पानी बहुत कम था। शहर के लाेगाें की प्यास बुझाने ट्यूबवेलों का पानी लिया गया तो भी 67 लाख लीटर राेज की डिमांड की जगह 24 लाख लीटर राेज ही पानी ही मिल पाया था। प्राइवेट पानी टैंकरों का 491 रुपए प्रति टैंकर के हिसाब से 92 लाख रुपए का पानी खरीदा गया था तब सप्लाई हो पाई थी। इस साल ताप्ती और माचना दोनों में एनीकट में पर्याप्त पानी है। वहीं राेज एक कराेड़ लीटर पानी सप्लाई करने के बावजूद नपा काे काेई परेशानी नहीं आई है। न ही टैंकर से सप्लाई करना पड़ा।
इस साल हैंडपंपों ने भी दिया सहारा, नहीं हुए बंद
जिले में कुल 11891 हैंडपंप हैं। इस साल इनमें से भूजलस्तर गिरने से केवल 467 बंद हुए हैं। पिछले साल 1597 हैंडपंप भूजलस्तर गिरने से बंद हुए थे। पिछले साल मई के अंत में भूजलस्तर 92 फीट नीचे पहुंच गया था। इस साल यह केवल 70 फीट पर है, यानी 22 फीट ज्यादा है पानी है।
2018 में 15 अरब लीटर, 2019 में 5 अरब लीटर इस साल 50 अरब लीटर है स्टोर
2018 में जिले के सभी बांधों में सिंचाई के लिए पानी देने के बाद 15 अरब लीटर पानी ही बचा था। पेयजल के लिए अधिकांश पानी रिजर्व किया था। 2019 में बांधों में पानी केवल 5 अरब लीटर बचा था। वहीं 2020 में सिंचाई के लिए पानी दिए जाने और पहली बार तीसरे फसल के लिए पानी देने के बावजूद भी अब भी 50 अरब लीटर पानी स्टोर है। सांपना और पारसडोह में रिजर्व पानी लेने की नौबत ही नहीं आई।
जिले के 157 डैमाें में 293 अरब लीटर पानी हुआ था स्टाेर, अब बचा 50 अरब लीटर
पिछले साल जून महीने के अंत में केवल पारसडोह ही ऐसा डैम था जिसमें 1.5 अरब लीटर पानी बचा था। अन्य सभी डैम पूरी तरह सूख गए थे। सांपना में भी एलएसएल के आसपास ही पानी था। जिले के 300 अरब लीटर स्टोरेज क्षमता वाले 157 बांधों में 2019 में वाटर लेवल एलएसएल से नीचे था। इस साल बुंडाला में 1.8 अरब लीटर, पारसडोह में 36 अरब लीटर, सांपना डैम में 2 अरब लीटर पानी अब भी बचा है। केवल चंदोरा ही एकमात्र ऐसा डैम है जिसमें वाटर लेवल शून्य है। वहीं अन्य 153 डैमाें में भी पानी बचा हुआ है।
पानी के लिए 2019 में हुए थे आंदोलन
2019 में पानी नहीं मिलने के कारण पूरे शहर में आंदोलन हुए थे। 11 मई को चार दिन के अंतराल पर पानी दिए जाने के विरोध में महिलाएं बर्तन लेकर नपा पहुंच गई थी। इसी तरह 17 जून 2019 को गोठाना के रहवासियों ने स्टेट हाईवे 43 पर चक्काजाम किया था।
इस साल जल्द भरा जाएंगे डैम
69 अरब लीटर क्षमता वाले पारसडोह बांध में अब भी 36 अरब लीटर पानी है। बारिश के शुरुआती दौर में ही इसके भरने की संभावनाएं हैं। बुंडाला में भी पिछले साल की तुलना में अच्छा पानी है। 1 अरब 80 करोड़ लीटर पानी बुंडाला में है।
- जीपी सिलावट, ईई, जलसंसाधन विभाग, मुलताई डिविजन
पानी रिजर्व कराया था, लेकिन लिया ही नहीं
सांपना डैम से इस साल तीन बार फसलों के लिए पानी दिए जाने के बावजूद 2 अरब लीटर पानी स्टोर है। पेयजल के लिए नपा ने पानी रिजर्व करवाया था, लेकिन लिया नहीं। साथ ही कोसमी, गोधना और मोखा जैसे छोटे बांधों में भी पर्याप्त पानी है।
एके डेहरिया, ईई, जलसंसाधन विभाग, बैतूल डिविजन
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