शहर में सर्व सुविधायुक्त स्टेडियम नहीं है, इससे विभिन्न स्तर की खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी करने के लिए एकमात्र कॉलेज के मैदान पर यहां के खिलाड़ी निर्भर है। वहां भी खिलाड़ी खुद ही व्यवस्थाएं जुटा रहे हैं।
शहर में खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधायुक्त स्टेडियम और रनिंग ट्रैक न होने के कारण खिलाड़ी परेशान हो रहे हैं। ऐसे में विभिन्न स्तर की खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे खिलाड़ियों ने खुद शहर के शासकीय कॉलेज के मैदान की घास काटकर, अपने खर्चे पर मिट्टी डलवाकर रनिंग ट्रैक तैयार किया। अब यहां सुबह और शाम अभ्यास कर रहे हैं। उनका दर्द है की शहर में सुविधा युक्त स्टेडियम होना चाहिए, जहां खेलकर शहर की खेल प्रतिभा तैयार होकर शहर का नाम रोशन कर सकें।
जीवाजी विश्वविद्यालय की तरफ से राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में दो गोल्ड मेडल जीत चुके शहर के एथलीट पंकज रावत अब शहर में खिलाड़ियों को निःशुल्क प्रशिक्षण देकर नए एथलेटिक्स तैयार कर रहे हैं। शहर में खिलाड़ियों के लिए कोई स्टेडियम न होने के कारण वह शहर के एकमात्र शासकीय वृन्दासहाय कॉलेज के मैदान में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। यहां खुद के खर्च पर व्यवस्थाएं उन्हें प्रशिक्षण देने जुटाना पड़ रही हैं। शिक्षक और अंतरराष्ट्रीय मैराथन धावक एवं योग प्रशिक्षक सुरेंद्र रावत के शिष्य पंकज रावत ने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय महाविद्यालय प्रतियोगिता में 400 मीटर एवं 200 मीटर बाधा दौड़ में गोल्ड मेडल प्राप्त किया। साथ ही प्रतियोगिता के बेस्ट एथलीट भी रहे थे। अब वह राष्ट्रस्तरीय प्रतियोगिता के लिए तैयारी कर रहे हैं और शहर से भी एथलेटिक्स में प्रतिभा निकल कर सामने आएं, इसलिए वह निःशुल्क खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। फिलहाल ज्योति बाथम, मासूम श्रीवास्तव, 9 वर्ष की पूनम शर्मा और लोकेंद्र साहू को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
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