Thursday, July 23, 2020

नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुलेंगे लेकिन सिर्फ एलईडी से ही कर सकेंगे दर्शन श्रद्धालु

महाकालेश्वर के शीर्ष तल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी पर श्रद्धालु दर्शन के लिए नहीं जा पाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए दूसरे माले पर स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के पास एलईडी पर दर्शन कराने की व्यवस्था की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए नागचंद्रेश्वर और महाकालेश्वर के दर्शन की एक ही कतार रहेगी। श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर लाइव दर्शन एलईडी के सामने से होकर महाकालेश्वर के दर्शन कर निर्गम द्वार से बाहर निकलेंगे।
नागपंचमी 25 जुलाई को है। महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष तल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर केवल इसी दिन आम श्रद्धालुओं के
लिए खोला जाता है। मंदिर में
24 घंटे दर्शन होंगे। 24 जुलाई की रात 12 बजे महानिर्वाणी अखाड़े के महंत गर्भगृह का ताला खोल कर भगवान नागचंद्रेश्वर महादेव की पूजा अर्चना करेंगे। शासन की ओर से कलेक्टर और अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे।
कोरोना संक्रमण के चलते केंद्र सरकार की गाइड लाइन अनुसार मंदिरों के गर्भगृह में प्रवेश बंद होने से श्रद्धालुओं को नीचे ओंकारेश्वर मंदिर के बाहर एलईडी पर ला‌इव दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। गर्भगृह में केवल पुजारी ही प्रवेश करेंगे। मंदिर के पट 25 जुलाई की रात 12 बजे पूजन आरती के बाद एक साल के लिए बंद हो जाएंगे।

एक ही कतार लगाई जाएगी

  • श्रद्धालु ऑनलाइन बुकिंग करा सकते।
  • जो ऑनलाइन बुकिंग नहीं करा पाएंगे वे मंदिर के शंख द्वार से 250 रुपए की सशुल्क दर्शन सुविधा का लाभ ले सकेंगे। उन्हें फेसिलिटी सेंटर, मार्बल गलियारे से परिसर में ओंकारेश्वर मंदिर के सामने एलईडी के पास से महाकालेश्वर मंदिर में प्रवेश देंगे।
  • वे कार्तिकेय मंडप से होकर निर्गम द्वार की ओर जाएंगे।
  • श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में कहीं और जाने की अनुमति नहीं होगी।

बाबा महाकाल के सान्निध्य में तक्षक, इसलिए यहां हैं नागचंद्रेश्वर मंदिर

महाकाल मंदिर स्थित महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरि कहते हैं- कोई लिखित प्रमाण नहीं है लेकिन संत बताते हैं तीन नागों की मान्यता है- वसूकी, शेष और तक्षक। वासुकी नाग का स्थान प्रयाग में है। शेष नाग समुद्र में भगवान विष्णु की सेवा में रहते हैं। तक्षक ने महादेव की तपस्या कर यह वरदान ले लिया है कि वे शिव के सान्निध्य में रहेंगे। महाकाल के साथ नागचंद्रेश्वर भी यहां विराजित हैं। तक्षक की प्रकृति एकांत है, इसलिए उन्हें एकांत दिया है। वर्ष में केवल एक बार वे दर्शन के लिए प्रकट होते हैं। यह अद्भुत प्रतिमा केवल नागचंद्रेश्वर मंदिर परिसर में ही है। इस दिन नागचंद्रेश्वर के गर्भगृह में प्रवेश करने का महत्व है। कोरोना के चलते गर्भगृह में प्रवेश बंद है, इसलिए लाइव दर्शन ओंकारेश्वर मंदिर के पास एलईडी से कराए जाएंगे। नागचंद्रेश्वर के दर्शन से श्रद्धालु के सभी दोष समाप्त हो जाते हैं।

एक ही फ्रेम में लाइव : नागपंचमी पर मंदिर समिति महाकालेश्वर व नागचंद्रेश्वर दोनों का एक साथ लाइव प्रसारण करने की व्यवस्था कर रही है। एक ही फ्रेम में दोनों के लाइव दर्शन श्रद्धालुओं को हो सकेंगे। मंदिर समिति के अध्यक्ष आशीष सिंह ने सभी श्रद्धालुओं से घर से ही लाइव दर्शन करने का अनुरोध किया है।



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