कोरोना वायरस का संक्रमण कितना हमलावर है यह अभी तक कोई नहीं समझ सका है। कोविड मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर भी अचरज में हैं, वे जिस मरीज के रिकवरी करने और स्वस्थ होने की उम्मीद लगाते हैं चंद घंटों में ही वह दम तोड़ रहा है। स्थिति अब दो-चार महीने पहली जैसी कतई नहीं है। हालात बिगड़ते जा रहे हैं, लाेग अभी भी संक्रमण होने या न होने की स्थिति में भी पहले घरेलू इलाज, तकलीफ बढ़ने पर अपने परिचित डॉक्टरों की सलाह पर एक-दाे दिन खराब कर देते हैं। जब हालत बर्दाश्त के बाहर होती है तो अस्पताल पहुँचते हैं तो डॉक्टर के पास भी करने के लिए कुछ खास नहीं होता। इस संक्रमण से बचने के लिए जरूरी है कि सतर्कता के साथ समय पर अस्पताल पहुँचा जाए।
फेफड़े हो रहे जाम, थम रहा लीवर और दिल
मेडिकल काॅलेज के कोविड नोडल अधिकारी डॉ. संजय भारती सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के कोविड वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों की बदलती स्थिति से हैरान हैं। वे बताते हैं की मरीज में ऑक्सीजन सेच्यूरेशन इस तेजी से गिरता है कि हाई फ्लो, वेंटिलेटर सपोर्ट भी काम नहीं कर पाते। कुछ समय में ही मरीज दम तोड़ रहे हैं। शहर में ऐसे मरीजों की भी मौत हुई जिन्हें रेमसेडिवर व अन्य महँगे इंजेक्शन दिए गए, हालत में कुछ दिन सुधार दिखा फिर अचानक हालत बिगड़ी तो बचाया नहीं जा सका।
कलेक्ट्रेट कर्मी को 9वें दिन बताया पॉजिटिव, थमा दी पर्ची
सैंपल की रिपोर्ट में लेट लतीफी अब फिर से समस्या बनती जा रही है। निजी लैब में कम सैंपल जाने से मेडिकल की वायरोलॉजी लैब में लोड बढ़ गया है। पिछले दिनों कलेक्ट्रेट में एक एडीएम के पॉजिटिव आने के बाद उनके क्लोज काॅन्टेक्ट वाले स्टाफ ने 10 सितंबर को सैंपलिंग कराई। स्नेह नगर स्थित फीवर क्लीनिक में एक कर्मचारी ने सैंपल दिया तथा जब वे पाँचवें दिन रिपोर्ट पता करने पहुँचे तो कहा गया कि कोई फोन नहीं आया तो निगेटिव ही समझो। शुक्रवार को जब उनका बेटा एक बार फिर रिपोर्ट की जानकारी लेने पहुँचा तो उन्हें पॉजिटिव बताकर वहाँ मौजूद डेंटिस्ट ने एक प्रिस्क्रिप्शन थमा दिया जिसमें 14 दिन होम क्वारंटीन रहने की सलाह के साथ ही चंद दवाएँ लिखीं थीं। इस तरह यदि कोविड रिपोर्ट की जानकारी देने में लापरवाही बरती जाएगी तो संक्रमण रोकने की कोशिशें कारगर होना मुश्किल ही है।
स्वशासी चिकित्सा कर्मियों को मिलेगा चिकित्सा खर्च| चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मेडिकल व डेंटल काॅलेजों के स्वशासी अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए मप्र सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम 1958 लागू किया है। यह लाभ एक मार्च 2020 से देय होगा। कोविड संकट के दौरान मेडिकल काॅलेज के चिकित्सक व कर्मचारी लगातार चिकित्सा प्रतिपूर्ति भत्ते की माँग कर रहे थे।
5 साल में रिन्यू होगा फार्मासिस्ट लाइसेंस| कोरोना संकट में शासन ने केमिस्टों को राहत देते हुए उनके फार्मासिस्ट लायसेंस की नवीनीकरण अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर पाँच साल कर दी है। जबलपुर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर बठेजा, सचिव डॉ. चंद्रेश जैन ने बताया कि पहले यह नवीनीकरण 5 साल में ही होता था, दो साल पहले अधिकारियों से इसे एक साल कर दिया था। सरकार से इसमें बदलाव की लगातार माँग की जा रही थी।
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