कोरोना संक्रमण रोकने के लिए तीन दिन पहले कलेक्टर ने जिला चेक पोस्ट शुरू की और बाहरी जिले व राज्यों से आ रही लोगों की एंट्री के साथ ही स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी है। 2 सितंबर से ही माननखेड़ा टोल नाके और बड़ावदा चेकपोस्ट पर स्वास्थ्यकर्मी एवं प्रशासनिक अमला जांच कर रहा है। ये दीगर बात है कि इन कर्मचारियों को जांच के लिए ना स्क्रीनिंग मशीन दे रखी, ना सैनिटाइजर है और ना ही पल्स ऑक्सीमीटर दे रखा है।
सिर्फ खानापूर्ति लेकिन अब बस संचालकों ने इस व्यवस्था को चैलेंज किया है। बस ऑनर्स एसोसिएशन जिला उपाध्यक्ष अयूब मेव का कहना है सोमवार से बसें चालू होंगी। प्रत्येक बस के हर यात्री की जांच व नाम-पते लिखने में आधा घंटा लगेगा और इतना समय बर्बाद होने शेड्यूल बिगड़ेगा जिससे विवाद होंगे। इसलिए बसों में यात्रियों की स्क्रीनिंग या नाम-पते लिखने की प्रक्रिया हुई तो हम हड़ताल कर देंगे।
इधर प्रशासनिक अमले को खुद स्पष्ट नहीं है कि वे बसों में सवार यात्रियों की स्क्रीनिंग करेंगे भी या नहीं। बीएमओ डॉ. दीपक पालड़िया ने कहा कि अभी बसों के यात्रियों की जांच या स्क्रीनिंग संबंधी कोई नए आदेश नहीं हैं। सोमवार सुबह ही स्थिति स्पष्ट होगी। चेक पोस्ट इंचार्ज एवं तहसीलदार स्वाति तिवारी का कहना है अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। वैसे तो रतलाम जिले की सीमा में आने वाले सभी लोगों की स्क्रीनिंग व नाम-पते दर्ज किए जा रहे हैं।
बसों को लेकर यदि नए आदेश आएंगे तो उस अनुसार निर्णय लेंगे। जहां तक थर्मल स्क्रीनिंग मशीन, सैनिटाइजर व पल्स ऑक्सीमीटर जैसे उपकरण की बात हैं तो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग से बात की जाएगी। बता दें कि माननखेड़ा चेकिंग पाइंट पर रोज सुबह 6 से रात 10 बजे तक दो शिफ्ट में कर्मचारी बाहर से आ रहे लोगों के नाम-पते लिखकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे हैं।
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