Wednesday, September 23, 2020

शव कुतरने के मामले में अब तक... मरीज की फाइल, ‘पेस्ट कंट्रोल का एग्रीमेंट’ मांगा

यूनिक अस्पताल के बेसमेंट में 87 वर्षीय नवीनचंद्र जैन की देह चूहों द्वारा कुतरे जाने के मामले में मजिस्ट्रियल जांच के पहले दिन एडीएम अजयदेव शर्मा ने अस्पताल से मरीज का रिकॉर्ड कब्जे में लिया। परिजन से कोई संवाद नहीं हुआ। पहले एप्पल हॉस्पिटल और गोकुलदास अस्पताल में भी लापरवाहियां सामने आई थीं, जिनमें ऐसे ही जांच की औपचारिकता निभाई गई। इस बार फर्क इतना है कि प्रथम दृष्टया दोषी चूहों (जिन्होंने बुजुर्ग का शव कुतरा) को लेकर स्वास्थ्य अमला सजग हो गया है।

सीएमएचओ ने यह जानने के लिए कि बाकी अस्पतालों में चूहों पर अंकुश लगाने कुछ किया है या नहीं, सभी से पेस्ट कंट्रोल कंपनियों से किए एग्रीमेंट की कॉपी मांगी है। उधर, निगम कर्मचारी ने अस्पताल के दावे काे खारिज किया है कि एंबुलेंस के लिए रात को फोन किया गया था। मामले की शिकायत मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष से भी की गई है।

मजिस्ट्रीयल जांच रिपोर्ट 15 दिन के भीतर पेश करना है। प्रारंभिक पड़ताल में ये बात सामने आई है कि मरीज की मौत 20 सितंबर की रात 11 बजकर 55 मिनट पर हुई। कुछ देर शव आईसीयू में रहा, फिर पैक कर दिया गया। बाद में कर्मचारियों ने इसे बेसमेंट में रख दिया।

मजिस्ट्रियल जांच के ये बिंदु
1. मरीज की मौत किन परिस्थितियों में हुई?
2. कोविड संबंधी टेस्ट रिपोर्ट कब प्राप्त हुई तथा उन्हें अस्पताल में कब भर्ती किया, क्या उपचार हुआ?
3. यूनिक अस्पताल में किसी उपचाररत मरीज की मृत्यु हो जाने पर आगामी प्रक्रिया क्या अपनाई जाती है?
4. क्या अस्पताल में किसी उपचाररत मरीज की मृत्यु उपरांत शव रखने के लिए समुचित व्यवस्था है?
5. इस घटना में यूनिक अस्पताल में मृतक नवीनचंद्र जैन के शव के संबंध में क्या परिस्थितियां बनी तथा इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

शव सौंपने का तय है प्रोटोकॉल, उसे भी तोड़ा

  • कोविड से मौत के मामले में प्रोटोकॉल तय हैं। मरीज की मृत्यु होते ही एसडीएम को सूचना देना होती है और फिर परिजन को बताया जाता है।
  • शव लेने के लिए नगर निगम का वाहन आता है, दूसरी व्यवस्था से शव नहीं ले जा सकते।
  • अस्पताल प्रबंधन शव को परिजन को नहीं सौंप सकते। सिर्फ निगम के वाहन में ही शव जाते हैं।
  • परिजन के बताए अनुसार निगम का वाहन शव मुक्तिधाम में छोड़ देता है। शुरुआती दौर में कोविड शवों के लिए मुक्तिधाम भी तय थे।

परिजन बोले- कोई अफसर मिलने तक नहीं आया

मजिस्ट्रियल जांच के आदेश के साथ ही परिवार को अफसरों ने कहा था कि मंगलवार को उनके बयान लिए जाएंगे। दिनभर परिजन इंतजार करते रहे, लेकिन बयान लेने तो दूर कोई मिलने तक नहीं आया। उन्होंने बताया कि अब मामले में कलेक्टर से मिलेंगे और अस्पताल की शिकायत सीएमएचओ को भी करेंगे।

विवाद हो रहा था इसलिए एंबुलेंस दूसरी जगह भेज दी
निगम के जन्म-मृत्यु पंजीयन विभाग के अजीत कल्याणे ने रात में एंबुलेंस के लिए फोन करने संबंधी अस्पताल प्रबंधन के दावे को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल से सोमवार सुबह 10 बजे कॉल आया था। रामबाग मुक्तिधाम से एंबुलेंस भेजी थी, लेकिन वहां विवाद हो रहा था इसलिए डिमांड आने पर दूसरे अस्पताल भेज दी।

कर्मचारियों ने जहां शव रखा, उसके पास ही कैंटीन है
कर्मचारियों ने जिस जगह शव रखा था, वहीं कैंटीन भी है। इससे संक्रमण खाने तक पहुंचने का डर भी था। उधर, पता लगा है कि सोमवार सुबह 8 बजे जब जैन के परिजन पहुंचे तो कहा गया कि बॉडी रखवा दी है, निगम की गाड़ी आएगी, तब हैंडओवर करेंगे। इसके उलट दोपहर 12 बजे अस्पताल की एम्बुलेंस में ही शव मुक्तिधाम भेज दिया।

खोदा पहाड़ निकला चूहा… अस्पतालों की लापरवाहियों पर सिर्फ जांच पर जांच

गोकुलदास हॉस्पिटल | 7 मई को छह घंटे में चार मरीजों की मौत हुई। 13 मरीजों को अन्य अस्पताल भेजा। भर्ती पर रोक लगाई। लाइसेंस निरस्त कर दिया।
नतीजा: महीनेभर बाद अस्पताल फिर खोल दिया गया।

एप्पल हॉस्पिटल | कोरोना मरीज को 6 लाख का बिल दिया। प्रशासन ने नोटिस दिया। रिकाॅर्ड की प्रारंभिक जांच में ही कई अनियमितताएं मिली।
नतीजा: अस्पताल पर कार्रवाई नहीं। सीएम के निर्देश पर खर्च की गाइडलाइन जारी की।

एमवाय हॉस्पिटल | मर्च्युरी में शव नरकंकाल बन गया। 15 सितंबर को यह मामला सामने आया। जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई।
नतीजा: छह लोगों को सस्पेंड किया। अधीक्षक को नोटिस भी जारी हुआ।



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पैर की कई अंगुलियां चूहों ने कुतर दी थीं।


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