कोरोना के कारण किडनी मरीजों की परेशानी बढ़ गई हैं। वे जिन अस्पतालों में नियमित डायलिसिस कराते थे, अब वहां डायलिसिस नहीं हो रहा। यदि किसी की रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाए तो उसे कई अस्पतालों में भटकना पड़ रहा। हुकुमचंद पॉलीक्लिनिक में सात मशीनें हैं, जहां कोरोना संदिग्ध मरीजों का भी डायलिसिस किया जा रहा है, लेकिन एमवायएच में छह में से चार मशीनें खराब पड़ी हैं, जिसके कारण मरीजों की फजीहत हो रही है। इन्हें दुरुस्त नहीं कराया गया। यहां सिर्फ 10-12 डायलिसिस हो पा रहे हैं।
यदि डायलिसिस पूर्व मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाए तो ओपीडी आधार पर भी उनका डायलिसिस नहीं हो पाता। मरीजों को आईसीयू में भर्ती किया जाता, जिसके कारण उनकी जेब पर ज्यादा भार पड़ रहा। शहर के दो-तीन निजी अस्पतालों में व्यवस्था की गई है, लेकिन वहां भी इमरजेंसी में मना कर दिया जाता है। मेडिसिन विभाग का कहना है कि मशीनों को दुरुस्त कराने के लिए अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखा है।
सीधी बात: डॉ. पीएस ठाकुर, एमवाय अस्पताल अधीक्षक
- आपके यहां छह में से चार डायलिसिस मशीनें खराब हैं?
- संबंधित शाखा द्वारा कंपनी को सूचित किया था।
- इन मशीनों को ठीक करवाने के लिए यूनिट ने आपको कई पत्र लिखे?
- कंपनी से एएमसी का प्रस्ताव बनवाकर अधीक्षक के पास भेजना मेडिसिन विभागाध्यक्ष का काम है। अभी तक कोई भी एएमसी प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया गया।
- इन्हें ठीक करवाने के लिए आपने क्या कार्रवाई की?
- जैसे ही एएमसी प्रस्ताव आएगा, तत्काल स्वीकृति प्रदान की जाएगी।
- कोरोना काल में किडनी के मरीज निजी अस्पतालों में परेशान हो रहे हैं। फिर भी एमवायएच ने इन्हें दुरुस्त क्यों नहीं करवाया?
- अभी तक मेडिसिन विभाग ने एएमसी प्रस्ताव क्यों प्रस्तुत नहीं किया, इसके लिए पत्र लिख रहा हूं।
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