हड़ताल के चंद घंटों पहले आयुध कर्मियों की स्ट्राइक को टालने का निर्णय ले लिया गया है। रक्षा मंत्रालय और फेडरेशनों के बीच 9 घंटों तक चली मीटिंग के बाद निष्कर्ष आया कि अब न तो सरकार निगमीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी और न ही आयुध कर्मी हड़ताल पर जाएँगे। आने वाले समय में दोनों पक्ष बैठकर बातचीत के जरिए सहमति से रास्ता निकालेंगे।
शुक्रवार को चीफ लेबर कमिश्नर ऑफ इंडिया की मध्यस्थता में रक्षा मंत्रालय उत्पादन विभाग के अधिकारी तथा राष्ट्रीय स्तर के नेता सुबह 8 बजे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। रात 8 बजे राहत भरी खबर निकलकर आई। दोनों पक्षों में तय हुआ कि औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33 के अंतर्गत यथास्थिति बनाए रखी जाएगी। श्रमिक नेता रामप्रवेश, राकेश शर्मा, राजेंद्र कुमार, रूपेश पाठक, प्रेम सेन, अरुण मिश्रा, सतिन शर्मा, संजय मिश्रा, संजय सिंह, सिद्धार्थ सिंह, राजेश रजक ने इसे एकता की जीत बताया है।
शेयर बाजार में लिस्टिंग का ऐलान गलत
एआईडीईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसएन पाठक, बीपीएमएस के संगठन मंत्री नरेंद्र तिवारी, आईएनडीडब्ल्यूएफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अरुण दुबे का कहना है कि वित्त मंत्री द्वारा ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के निगमीकरण तथा शेयर बाजार में लिस्टिंग की घोषणा न्याय संगत नहीं है।
प्रवेश पत्र न लाने से बिगड़े थे हालात
चार्जमैन की परीक्षा के दौरान बनी विषम परिस्थितियों पर आयुध निर्माणियाँ शिक्षण संस्थान खमरिया ने अब जाकर स्पष्टीकरण दिया है। उपनिदेशक एसके सिंह का कहना है कि परीक्षा में अलग-अलग विषय के लिए परीक्षार्थियों को 3-4 एडमिड कार्ड दिए गए थे लेकिन अधिकांश आयुध कर्मी एक ही कार्ड लेकर पहुँचे। यही वजह है कि उनकी बैठक व्यवस्था गड़बड़ा गई। बाद में तत्काल अतिरिक्त कक्ष की व्यवस्था कराई गई। यह भी कहा गया है कि कक्ष में मोबाइल प्रतिबंधित थे लिहाजा, पेपर लीक की गुंजाइश नहीं बनती है।
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