शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए लाए गए 21 प्रस्तावों में बड़े-बड़े प्रस्तावों पर आज तक अमल ही नहीं हो पाया है। अफसर ग्वालियर हैबिटेड एंड ट्रेड सेंटर, हैरिटेज होटल, बीआरटी कॉरिडोर, हैरिटेज नेटवर्क ट्रेल, ई-रिक्शा और स्मार्ट हेल्थ सुविधा आदि को भुला चुके हैं। स्मार्ट रोड और महाराज बाड़ा का जीर्णोद्धार कागजों से बाहर नहीं निकल पाए हैं।
ये हालात तब हैं, जब ग्वालियर स्मार्ट सिटी डवलपमेंट कॉर्पोरेशन के काम करने का एक साल ही बचा हुआ है। जो काम पूरे कर लिए गए हैं। उनकी देखभाल ठीक से नहीं हो पा रही है। ग्वालियर स्मार्ट सिटी डवपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड (जीएससीडीसीएल) ने हर काम की समय सीमा तय कर रखी थी। अधिकारियों ने उन छोटे-छोटे कामों को पूरा कर वाहवाही लूटने की कोशिश की,लेकिन बड़े कामों पर नजर तक नहीं दौड़ाई गई। यहीं वजह है कि जिनका लाभ सीधा ग्वालियर के लोगों को मिलता। उनकी नींव तक नहीं रखी गई। डिजिटल म्यूजियम एंड प्लेनटोरियम अभी भी जनता के लिए नहीं खुल सका है।
ये है स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का हाल
एबीडी प्रोजेक्ट: महाराज बाड़ा का जीर्णोद्वार
इमारतों को बाहर से सुंदर किया। फसाड लाइटिंग अभी तक नहीं हुई। सेंट्रल लाइब्रेरी विकसित हो गई। टाउन हाॅल में काम चल रहा है। शासकीय प्रेस और गोरखी कॉप्लेक्स में कुछ नहीं हुआ।
- प्लेस मैकिंग आफ राजपथ: कोई काम नहीं।
- छत्री मंडी की मार्केट का विस्तार : अभी तक विचार नहीं किया.
- स्मार्ट रोड विकसित करना : टेंडर 242 करोड़ के हो चुके हैं। धरातल पर काम शुरू नहीं।
- स्वर्ण रेखा को विकसित करना: टेंडर प्रक्रिया में उलझा हुआ।
- आमखो बस स्टैंड का पुन: निर्माण : इस पर कोई विचार नहीं हुआ।
- ग्वालियर हैबिटेड एंड ट्रेड सेंटर: शुरूआत में दो जगह तय की गई। अब मामला ठंडे बस्ते में।
- स्किल डवलपमेंट सेंटर: कोई काम नहीं हुआ।
पेन सिटी प्रोजेक्ट: कमांड एंड कंट्रोल सेंटर: सिर्फ आईटी का काम पूरा हुआ है। अभी सिविल वर्क बाकी है।
- इंटर एंड इंट्रा सिटी बस सुविधा : कुछ बसें चलीं। अभी तक पूरी बसें नहीं आ पाईं।
- स्मार्ट पार्किंग मैनेजमेंट: नगर निगम की पार्किंग को लेकर स्मार्ट कर दी गईं। कुछ जगह बनाई गईं। वहां टेंडर के अनुसार सुविधा नहीं।
- पब्लिक बाइक शेयरिंग कम साइकिल ट्रैक: साइकिलें चलीं, लेकिन साइकिल ट्रैक नहीं बना।
- ई-रिक्शा: अभी तक कोई प्लान फाइनल नहीं।
- स्मार्ट पोल: इस पर काम चल रहा है।
- सोलर पैनल एंड रूफ टॉप: कोई काम नहीं।
- स्मार्ट हेल्थ सुविधा: मुरार में शुरू किया गया। सफलता नहीं मिली।
- स्ट्रीट स्वीपिंग मशीन: निगम ने स्वच्छता सर्वेक्षण में चला दीं।
- वन सिटी वन एप: ये काम जरूर पूरा हो चुका है।
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