कोरोना काल के चलते शहर की ऐतिहासिक परंपरा पर भी इसका असर दिख रहा है। अधिकारियों और आयोजक समिति की बैठक के बाद जो बदलाव सामने आए, उसके बाद 80 साल में पहली बार ऐसी स्थिति बनी कि इस वर्ष आजाद चौक में वाक युद्ध नहीं होगा। सिर्फ कंस दरबार यानी सोमवारिया में ही प्रतीकात्मक रूप से परंपरा निभाई जाएगी।
ज्ञात रहे मथुरा के बाद सिर्फ शाजापुर में ही कंस वधोत्सव मनाया जाता है। इस परंपरा को 268 साल से ज्यादा हो गए, जिसके चलते यह आयोजन सोमवारिया की छोटी सी गली से निकलकर देशभर में पहचान बना चुका है। कंस वधोत्सव की वर्तमान समिति के तुलसीराम भावसार के अनुसार गत दिनों अधिकारियों से हुई चर्चा के बाद इस बार जुलूस नहीं निकाला जाएगा।
सिर्फ कंस दरबार में ही प्रतीकात्मक आयोजन किए जाएंगे। भावसार के अनुसार आज यानी मंगलवार रात 9.30 बजे बाद कलाकारों द्वारा वाक संवाद किया जाएगा और रात 12 बजे पूजा अर्चना के बाद कंसवध कर दिया जाएगा।
कंस वध को देखने आसपास के बड़े शहरों के लोग भी आते हैं। इसके चलते आजाद चौक और सोमवारिया में हजारों लोगों की भीड़ लग जाती है। ऐसे में संक्रमण के फैलने के अंदेशे को लेकर अधिकारियों में चिंता, वहीं समिति ने भी आमजन के स्वास्थ्य को लेकर गंभीरता दिखाते हुए इस बार यह आयोजन प्रतीकात्मक कर दिया। आयोजन में 30 से ज्यादा कलाकार देव-दानव के पात्र निभाते हैं, लेकिन इस बार 5-5 कलाकारों को मौका दिया जाएगा।
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