Sunday, December 6, 2020

रात 11:30 बजे भी सड़कों से चौराहों तक लोगों का जमघट, रात में पुलिस की चैकिंग में सख्ती नहीं

21 नवंबर से नाइट कर्फ्यू शुरू हुआ था... रात 10 से सुबह 6 बजे तक, लेकिन तस्वीरें बताती हैं कि यहां नाइट कर्फ्यू सिर्फ नाम का है।

यहां सेल्फी का संक्रमण।

पहली तस्वीर... वीआईपी रोड की है। आम दिनों की तरह यहां भी रात 10:45 पर युवाओं का जमावड़ा लगा हुआ था। मास्क नदारद, सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल नहीं। राजा भोज की प्रतिमा के पास सेल्फी का आनंद उठा रहे युवा शायद संक्रमण से बेखबर हैं और जिम्मेदारों को इसकी परवाह नहीं है। पूरी वीआईपी रोड पर रात में अब भी युवाओें का जमघट लगा रहता है।

काजी कैंप की यह सड़क पर आम दिनों जैसा ही नजारा है। न कोई सख्ती और न ही नियमों की परवाह। यानी सब बेफिक्र हैं।

दूसरी तस्वीर... काजी कैंप की है। रात के 11: 20 बजे हैं और सड़कों पर वाहनों की आवाजाही भी उसी रफ्तार से हो रही है जिस रफ्तार से अभी संक्रमण बढ़ रहा है। प्रशासन का कर्फ्यू यहां गुल है। यहां इनसे न तो कोई पूछने वाला है कि आप इतनी रात को कहां जा रहे हैं या कहां से आ रहे हैं।

सोमवारा चौराहे से हमीदिया अस्पताल जाने वाली इस सड़क पर लोग बदस्तूर खरीदारी कर रहे हैं।

तीसरी तस्वीर... सोमवारा चौराहे से हमीदिया अस्पताल की ओर जाने वाली सड़क की है। रात के 11:25 बज रहे हैं। कुछ ठेले लगे हुए हैं। लाेग भी बकायदा इनसे सामान खरीद रहे हैं। सड़कों पर आवाजाही ठीक वैसी ही है जैसी आम दिनों में रहती है। इसके अलावा पुराने शहर के दस बजे के बाद भी किराना दुकान, डेयरी व चाय की होटलें खुली थी। लोगों की आवाजाही भी बरकरार थी। पुलिस की गाड़ी सायरन बजाती हुई निकल गई। इसे सुन कर कुछ बिजली बंद कर दी गई, पर दुकानें खुली रहीं।

अब बाकी शहर का हाल
रात के 10.50 बजे हैं, शाहपुरा हॉकर्स जोन में चाय की तीन दुकानें खुली हैं। यहां तीन चार पहिया और दो दोपहिया वाहन खड़े हैं। इन वाहनों के आसपास पांच युवक और दुकानों पर चार युवक जमे हैं। चूनाभट्‌टी चौराहे से कोलार तिराहे की ओर जाने पर शराब दुकान के पास नमकीन आदि की दो दुकानें खुली हैं। यहीं, सड़क के पार सब्जी का एक ठेला लगा है, यहां चार युवक सब्जी खरीद रहे हैं।

होशंगाबाद रोड पर रात 11:30 बजे
दवाई की दुकान के अलावा सभी दुकानें बंद थी। गाड़ियों की आवाजाही आम दिनों की तरह ही है। इस दौरान लोगों को घर में रहने की हिदायत देने वाली पुलिस न तो चौराहों पर दिखाई दी और न ही कहीं पेट्रोलिंग करते हुए। यानी नाइट कर्फ्यू सिर्फ कागजों में है और संक्रमण सड़कों से लेकर घरों तक पहुंच रहा है।

जो होना चाहिए वो हो नहीं रहा

  • कोरोना संक्रमित के घर पोस्टर चस्पा नहीं हो रहे।
  • होम आइसोलेशन में रहने वाले कई मरीज प्रोटोकाल का उल्लंघन कर रहे हैं, इनपर कोई निगरानी नहीं।
  • जिन इलाकों में संक्रमितों की संख्या अधिक वहां नहीं बने कंटेनमेंट जोन।

सरकार बोली... लोग भूल गए थे कि कोरोना है, याद दिलाने के लिए नाइट कर्फ्यू लगाया

त्योहारों के कारण लोगों में कोरोना संक्रमण के प्रति गंभीरता कम हो गई थी। लोग मास्क तक लगाना भूल गए थे। अधिकतर मास्क नहीं लगा रहे थे। नाइट कर्फ्यू से इस स्थिति में बदलाव आया है। लोग भी जागरूक हो रहे हैं। हम संक्रमण को रोकने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
-नरोत्तम मिश्रा, गृहमंत्री

दिन में आर्थिक गतिविधियां रहती हैं। इसलिए रात में कर्फ्यू लगाया। पहले भी लोगों को समझाया गया था। लेकिन लापरवाही बढ़ रही थी। कर्फ्यू से रात में लोग रुकेंगे, जागरुकता भी आएगी।
-प्रभुराम चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री

नाइट कर्फ्यू से पूरी तरह कोरोना रुकेगा, ऐसा तो बिल्कुल नहीं है। जो लोग सेहत के प्रति लापरवाह हो गए थे, वे फिर इस कदम ये सचेत हो जाएं, इसी मंशा से यह निर्णय लिया गया था।
-मोहम्मद सुलेमान, एसीएस स्वास्थ्य

रात में कर्फ्यू लगाने और जल्द बाजार बंद करने का उद्देश्य यह है कि आर्थिक गतिविधियां किसी भी स्थिति में प्रभावित न हों। काम भी चलता रहे। लोग भी जल्द ही घर पहुंच जाएं।
-अविनाश लवानिया, कलेक्टर



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वीआईपी रोड पर सेल्फी लेने में मशगूल ये युवा संक्रमण से बेखबर हैं। लेकिन जिन पर कर्फ्यू का पालन कराने की जिम्मेदारी है वे नदारद हैं।


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