Friday, December 4, 2020

लग्न मंडप से 500 मीटर दूर खुशियां खत्म

हम लोग निकल गए हैं, बारात दोपहर 12 बजे तक वहां लग जाएगी। मोजवाड़ी से मेहलू गांव की दूरी 40 किमी है। जल्द पहुंचने के लिए ड्राइवर ने काली घोड़ी जंगल का शार्टकट रास्ता अपनाया। दुर्घटनास्थल से लग्न मंडप (दुल्हन का घर) की दूरी महज 500 मीटर बची थी। ड्राइवर की एक गलती ने दो संसार उजाड़ दिए। दुल्हन और उसके परिजन तोरण द्वार पर बारात का इंतजार कर रहे थे। तभी अचानक मनहूस खबर आई कि मुक्तिधाम नाले के पास बारातियों का एक्सीडेंट हो गया है। मेहमान सहित गांव के लोगों को मदद के लिए दौड़ते देख दुल्हन (संगीता) भी खुद को रोक नहीं पाई। चंद सेकेंड में मंडप सूना हो गया। सूखे नाले की चट्‌टान और पानी के डबरे खून से भरा गए थे। समझ पाना मुश्किल हो गया था कि घायल कौन है और किसने दम तोड़ दिया है।
घायलों की नब्ज टटोल रहे ग्रामीणों में से अचानक आवाज आई दूल्हा (कुंवर सिंह) भी गयो। इतना सुनते ही दुल्हन ने अपने हाथों की चूड़ियां फोड़ दी, श्रृंगार को तहस-नहस कर चीखें मारकर रोने लगी। रोते-रोते दुल्हन बदहवास हो गई। इधर, दूल्हे के पिता सखाराम व मां गगयीबाई के भी सिर से खून बह रहा था। हाथ भी खून से भरे हुए थे। मां-पिता को लोगों ने दिलासा देते हुए कहा कुछ नहीं हुआ कुंवर भी ठीक है और ऐसा कहते हुए घटनास्थल से दूर किया। कुछ देर बाद घायलों को खालवा अस्पताल रवाना किया। लड़की पक्ष की ओर से शादी में शामिल होने आए मेहमान भी उदास मन से रवाना हो गए। पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया।

ट्रॉली से नीचे गिरे, पत्थरों से टकराए अधिकांश बाराती

इसी ट्रैक्टर ट्रॉली में बैठकर सभी बाराती हंसी-खुशी मौजवाड़ी से मेहलू गांव के लिए निकले थे। मेहलू गांव से महज 500 मीटर दूर मोड़ पर तेज गति होने से ट्रॉली अचानक झोल खा गई और इस पर सवार बाराती पुल से नीचे जा गिरे। यहां पत्थरों पर सिर टकराने और अधिक खून बहने से मौतें हुईं।

दर्दनाक : घायलों की हालत बात करने लायक भी नहीं थी
खालवा में प्राथमिक उपचार के बाद शाम 4 बजे घायलों को जिला अस्पताल लाया गया। शाम 5 बजे तक अलग-अलग वाहनों में 13 घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। इनमें ज्यादातर महिलाएं थी जिनकी हालत बात करने लायक नहीं थी। सिविल सर्जन ओपी जुगतावत, डॉ. शक्तिसिंह राठौड़, डॉ. काजोल प्रधान, डॉ. विजय मोहरे ने चेकअप कर भर्ती किया। पुलिसकर्मियों ने मशक्कत के बाद घायलों के नाम-पता पूछा। सीएसपी ललित गठरे व मोघट थाना टीआई बीएल अटोदे ने व्यवस्था संभाली।

आर्थिक मदद दी : मुख्यमंत्री व वन मंत्री ने व्यक्त किया शोक
इस घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व वन मंत्री विजय शाह ने शोक व्यक्त किया। इधर घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर अनय द्विवेदी, पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह घायलों से मिलने खालवा अस्पताल पहुंचे। कलेक्टर ने जनपद पंचायत सीईओ को मृतकों की अंत्येष्ठि के लिए आर्थिक सहायता व घायलों के बेहतर उपचार के निर्देश दिए। जिसके बाद अधिकारियों ने अंत्येष्ठि के लिए प्रत्येक मृतक के परिजन को 5 हजार रुपए की सहायता की।

आज होगा अंतिम संस्कार
शवों को खालवा अस्पताल में रखा गया। सभी की शिनाख्त हो गई है। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव सौंपे जाएंगे। इसके बाद मोजवाड़ी गांव में अंतिम संस्कार किया जाएगा। मृतकों में दूल्हा व चार महिलाएं मोजवाड़ी की थी, जबकि एक महिला नया हरसूद के प्रतापपुरा की बताई जा रही है।

दूल्हा-दुल्हन के घर से... भास्कर लाइव

पिता बोले- मेरे अरमानों का जनाजा निकल गया
राेशनी | गांव में सन्नाटे के बीच दुल्हन संगीता के घर लोगों के आने-जाने का सिलसिला शाम तक जारी रहा। मां और पिता को लोग सांत्वना दे रहे थे। पूरा परिवार सदमे से बाहर ही नहीं निकल पा रहा है। लोगों ने समझाइश दी तो पिता छोटेलाल ने कहा कि आज मेरे अरमानों का जनाजा निकल गया। दो बेटे व एक ही तो बेटी थी। जिसकी शादी धूमधाम से करने के सपने संजोये थे। इसलिए तो लॉकडाउन में शादी नहीं की। छोटेलाल ये कहते हुए रोने लगते है। बेटी को देने के लिए गृहस्थी की हर वस्तु खरीदी थी। सोचा भी नहीं था खुशियां इतनी करीब आकर ऐसे रूठ जाएगी। बारातियों व गांव वालों की मेहमान नवाजी के लिए बनाया गया भोजन भी रखा ही रह गया।

समझ नहीं आ रहा मंडप खोलें या बंधा रहने दें
खालवा | मोजवाड़ी गांव में दुल्हा कुंवर सिंह की शादी की खुशी में पिछले दो-तीन दिन से डीजे की धुन पर गाने और संगीत की महफिल सज रही थी। कुंवर का घर रोशनी से जगमग हो गया था। एक्सीडेंट की खबर आते ही दूल्हे के गांव में मातम छा गया। एक ही गांव के पांच लोगों की एक साथ मौत व 21 लोगों के घायल होने की खबर के बाद गांव में मातम छा गया। घर के मुखिया सखाराम व उनकी पत्नी गगयी बाई भी गंभीर है। उन्हें तो पता ही नहीं कि उनका दूल्हा राजा भी कालकलवित हो गया है। लोगों को समझ नहीं आ रही थी कि मंडप को खोले या बंधा ही रहने दे। शुक्रवार सुबह मृतकों को अंतिम संस्कार गांव के ही मुक्तिधाम पर किया जाएगा।



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Happiness ends 500 meters away from Ascendant Pavilion


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