Saturday, December 5, 2020

क्रोध को नौकर की तरह रखो, ताकि नियंत्रण कर सको

क्रोध को मालिक की तरह नहीं नौकर की तरह रखो। ताकि जब चाहो तब उस पर नियंत्रण कर सको। क्रोध से क्रोध शांत नहीं होता। बल्कि इसको शांत करने के लिए क्षमा रूपी जल की आवश्यकता होती है। क्षमा सारी समस्याओं का समाधान है। क्रोध जीवन को दुखमय व नर्क बना देता है।

यह सारी असफलताओं का कारण है। यह बात मुनिश्री कुन्थुसागर महाराज ने कही। वे श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर नेहानगर में क्रोध करने से होने वाले नुकसान के बारे में बता रहे थे। उन्होंने कहा कि क्रोध का त्याग कर क्षमा को अपनाएं इसी में जीवन की सार्थकता है।

क्षमा ईट का जवाब पत्थर से नहीं, बल्कि प्रेम से देना सिखाती है। जबकि क्रोध वह आग है, जो लकड़ी में लगती है तो उसी को जला देती है। क्षमा वह घाटी है, जहां पर शांति के फूल खिला करते हैं। क्रोध, विवेक, धर्म, राज्य सबको नष्ट कर देता है। क्रोध वह समस्या है, जो व्यक्ति को ही नहीं पूरे परिवार व समाज को अशांत बना देती है।



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