Saturday, October 19, 2019

ढाई हजार अटके प्रोजेक्ट को मिलेगी राहत, छोटे शहरों में भी शुरू हो सकेंगे उद्योग, हर उद्योग में 50 से 250 रोजगार

इंदौर .मैग्नीफिसेंट मप्र में मुख्यमंत्री कमलनाथ की उद्योगों के लिए तीन साल तक मंजूरी की अनिवार्यता खत्म करने की घोषणा से ऐसे छोटे और मझले उद्योगों को राहत मिलेगी, जो अब तक अनुमति के इंतजार में अटके पड़े थे। इससे दो से ढाई हजार छोटी यूनिट शुरू हो सकेंगी। हर उद्योग से 50 से 250 लोगों को रोजगार भी मिलेगा। सारी अनुमतियां सिंगल विंडो से मिलेंगी। मुख्यमंत्री ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कहा उद्योगपति को सरकारी या लीज पर जमीन नहीं चाहिए, खुद की जमीन है तो उसे किसी तरह की अनुमति पहले लेना जरूरी नहीं है। सीधे एमपीआईडीसी (मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) में आवेदन कर सिंगल विंडो से अनुमति लें, हम तीन साल तक कुछ नहीं पूछेंगे। उनके इस ऐलान से प्रदेशभर में अलग-अलग अनुमतियों में अटके ढाई हजार प्रोजेक्ट की राह आसान हो जाएगी। इन प्रोजेक्ट की लागत 1 से 10 करोड़ के बीच है।


फूड प्रोसेसिंग यूनिट व्हाइट कैटेगरी में :सीएस एसआर मोहंती ने बताया फूड प्रोसेसिंग यूनिट में मशीनरी को व्हाइट श्रेणी में डाल दिया है। ऐसे प्रोजेक्ट पहले ग्रीन कैटेगरी में थे। इससे फूड प्रोसेसिंग के लिए राह आसान हुई है। दाल, मसाले व छोटे उपक्रमों को राहत मिलेगी।


जमीन आवंटन प्रक्रिया बदल जाएगी :अब जमीन आवंटन के लिए कार्यकारी संचालक (क्षेत्रीय कार्यालय) को 10 हेक्टेयर व एमपीआईडीसी एमडी को 10 हेक्टेयर से अधिक के आवंटन के अधिकार होंगे। 20 हेक्टेयर तक अविकसित औद्योगिक भूमि एमडी एमपीआईडीसी दे सकेंगे। इससे ज्यादा का अधिकार सरकार के पास रहेगा। समिट के दौरान सीआईआई की नेशनल काउंसिल मीटिंग में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि ग्रामीण ग्रेजुएट हों। किसान धोती-पायजामा वाले रूप को बदलकर जींस-टीशर्ट वाले परिधान में दिखें। ग्रामीण युवाओं को बताना होगा कि वे कैसे खेती करें कि वह लाभकारी हो।

श्रीनिवासन बोले...पहली बार साउथ से नाॅर्थ में निवेश करने आ रहा हूं, इसके लिए मप्र सबसे अच्छा लगा :इंडिया सीमेंट के वाइस चेयरमैन और बीसीसीआई के पूर्व प्रेसिडेंट एन श्रीनिवासन ने पहली बार मैग्नीफिसेंट एमपी में भागीदारी की। उनसे बातचीत के अंश...


सवाल : मप्र में निवेश के बारे में क्या सोचते हैं?
जवाब : मैं पहली बार साउथ से नाॅर्थ की ओर आ रहा हूं। मप्र में बेहतर निवेश की संभावनाएं दिखती हैं, इसलिए दमोह और खंडवा में दो सीमेंट प्रोजेक्ट कर रहा हूं, जिसमें 1200 करोड़ का निवेश करूंगा और बाद में इसे तीन हजार करोड़ तक ले जाऊंगा।

सवाल : आर्थिक मंदी के दौर में निवेश कर रहे हैं?
जवाब : सीमेंट सेक्टर में मंदी नहीं है। देश को और हर राज्य को इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करना होता है, इसके बिना आगे निवेश संभव नहीं। आवास प्रोजेक्ट चल रहे हैं, इससे वहां मंदी नहीं है।

सवाल : बीसीसीआई में गांगुली आ गए हैं, क्या बदलाव देखते हैं?
जवाब : लोढ़ा कमेटी की सिफारिश के बाद बीसीसीआई पुराने स्वरूप में नहीं रहा। यह अब कर्मचारी संगठन बन गया है, चाहे उच्च स्तर पर कोई हो या सामान्य कर्मचारी। गांगुली आ गए हैं, बढ़िया है।



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Two and a half thousand stuck projects will get relief, industries can be started in small cities too


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