भोपाल .वन मंत्री उमंग सिंघार और विभाग के अपर मुख्य सचिव एपी श्रीवास्तव के बीच की खींचतान के कारण 60 से अधिक फाइलें अटक गई हैं। इनमें कई महत्वपूर्ण फाइलें शामिल हैं। खासतौर पर सीएम माॅनिट से जुड़ी ‘के प्लस’ वाली फाइलें भी हैं, जिन्हें रोक दिया गया है। इसके पीछे बढ़ी वजह यह है कि एक माह पहले वन मंत्री ने बिजनेस रूल का हवाला देते हुए बिना पूछे एसीएस दफ्तर के अधिकारियों का कार्य विभाजन कर दिया था। इसे लेकर श्रीवास्तव खफा हो गए। हाल ही में उन्होंने मुख्य सचिव एसआर मोहंती को इस स्थिति से अवगत कराया तो मामला मुख्यमंत्री कमलनाथ तक पहुंच गया। चूंकि अभी तक इस खींचतान का पटाक्षेप नहीं हुआ, लिहाजा एसीएस आॅफिस में फाइलें ठंडे बस्ते में चली गई हैं।
मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि वनमंत्री और एसीएस के बीच की अनबन के हालात एेसे हैं कि अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एपीसीसीएफ) जसवीर सिंह चौहान की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की फाइल पर वनमंत्री ने मंजूरी नहीं दिए जाने के कारण लिखे। यह भी कहा कि अधिकारियों की कमी है, इसलिए अनुमति नहीं दी जा सकती। वहीं श्रीवास्तव ने फाइल देखी तो फिर चौहान के पक्ष में टीप लिख डाली। हालांकि इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
इधर, बताया जा रहा है कि श्रीवास्तव की ओर से उच्च स्तर पर मौजूदा हालातों की जानकारी दे दी गई है। साथ ही एेसी परिस्थितियों में काम करने की मुश्किलों का भी जिक्र किया गया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ दो-तीन दिन में इस खींचतान पर दोनों से बात कर सकते हैं।
अटक गए काम... मंत्री-एसीएस के शीत युद्ध के चलते कई अहम फैसले रुक गए
- मुकुंदपुर पार्क से जुड़े मामले में आईएएस अधिकारी पीके सिंह की विभागीय जांच पर फैसला लेने की फाइल एक माह से अटकी है।
- वन मुख्यालय की ओर से एपीसीसीएफ समन्वय द्वारा मुख्यमंत्री माॅनिट की ‘के प्लस’ वाली फाइलें अपर मुख्य सचिव के आॅफिस को भेजी जा रही हैं, लेकिन वहां वे रिसीव नहीं की गईं।
- आईएफएस अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग की फाइलें भी अपर मुख्य सचिव के आॅफिस में ठंडे बस्ते में पड़ी हैं।
- मंत्री की ओर से आईएफएस अधिकारी जेएस चौहान की फाइल भी विभाग को भेजी गई थी, चूंकि इसमें प्रतिनियुक्ति का विषय है लिहाजा इस फाइल को आगे बढ़ा दिया गया है।
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