जिले में बरसात के पानी काे बचाने में नागरिकों के साथ-साथ नगरपालिका की भी रुचि नहीं है। बीते 10 साल में नपा ने रूफवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने के दायरे में अाने वाले (1500 वर्ग फीट से ज्यादा) वाले 541 मकान बनाने की अनुमति दी, इसके लिए नपा ने भूखंड के साइज के आधार पर रुपए जमा कराए। इनमें से केवल 31 लाेगाें ने ही पानी बचाने हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाया। 510 लाेगाें ने शर्त का उल्लंघन किया और सिस्टम नहीं बनवाए। यदि इन मकानों की छत पर नपा ही हार्वेस्टिंग सिस्टम बना देती ताे एवरेज 1500 वर्ग फीट की छत पर एक बारिश से जमा हाेने वाले औसतन 1 लाख 77 हजार लीटर पानी हिसाब से ही जाेड़ें ताे एक बारिश में 9 कराेड़ 2 लाख 70 हजार लीटर पानी बचाया जा सकता था।
नपा के पास 10 साल से इन लाेगाें के द्वारा जमा किए गए 68.23 लाख रुपए हैं। लेकिन नपा द्वारा इन रुपयों से रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण न कराना समझ से परे है। सीएमओ जीके यादव इसका गाेलमाेल जवाब देते हुए कहते हैं कि अभी तक क्याें नहीं बनवाए गए यह ताे नहीं बता सकता, लेकिन अब बनवाने की काेशिश करेंगे।
बारिश का पानी सहेजने के लिए 31 लाेग ही निकले जागरूक
बारिश का पानी सहेजने के लिए शहर के 31 लाेग ही जागरूक निकले। उन्होंने रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अपनाया। इन्हें भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की शर्त पर निर्माण की अनुमति मिली थी। 2.17 लाख रुपए जमा कराए। सिस्टम लगाने के बाद इन्हीं 31 लाेगाें ने जमा रुपए नगर पालिका से वापस लिए।
10 साल में 104 फीट से 148 फीट पर पहुंच गया भूजलस्तर
शहर का भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। 2010 में भूजल स्तर 104 फीट था। अब यह 148 फीट पर जा चुका है। अब भी लाेग नहीं चेते ताे आने वाले दिनाें में जल संकट गहराएगा।
नपा के जेई शिवम चाैरसिया बताते हैं कि 1500 वर्ग फीट की छत में जिले की सामान्य औसत बारिश में 1 लाख 77 हजार लीटर पानी आता है। इसमें पानी काे हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए जमीन में उतारा जा सकता है। कुछ पानी की शेष मात्रा भाप बनकर उड़ जाती है या फिर अन्य स्त्राेताें से बर्बाद हाेती है। उन्होंने बताया कि 1500 वर्ग फीट के मकान निर्माण के लिए रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य है। नपा 1500 वर्ग फीट या इससे अधिक एरिया के मकान पर राशि जमा कराती है।
ऐसे समझें बारिश के पानी को छत के माध्यम से बचाने का गणित
नपा रिकाॅर्ड के अनुसार शहर में 23200 पक्के मकान हैं। भूजल स्तर दिनाें दिन गिरता जा रहा है। गर्मी की दस्तक के साथ ही शहर के हैंडपंप, ट्यूबवेल जल स्तर गिरने से बंद हाे जाते हैं। लाेगाें अाैर अधिकारियाें की लापरवाही से अनमाेल पानी काे सहेजने के ठाेस प्रयास नहीं हाेते। हर वर्ष रूफवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए कार्यशालाएं हाेती हैं, लाेगाें काे शपथ भी दिलाई जाती है, लेकिन नतीजा सिफर ही रहता है। भू-जल रिचार्ज के लिए काेई उपाय नहीं हाे पा रहे हैं। शहर के 510 मकान मालिकाें ने पानी सहेजने के नाम पर 68.23 लाख रुपए जमा करा दिए, लेकिन हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं अपनाया। नपा के अधिकारियों ने भी इसके लिए कोई प्रयास नहीं किए। इस कारण एक सीजन की बारिश में 510 मकानों की छत से अाैसतन 9 कराेड़ 2 लाख 70 हजार लीटर पानी बेकार बह जाता है। यदि इसे धरती में उतार देते तो भूजलस्तर बढ़ जाता। यही कारण है कि शहर में एक ही समय पानी सप्लाई हाे रही है। शहर का जल स्तर 148 फीट नीचे पहुंच गया है।
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