Saturday, July 25, 2020

संस्थाओं के अनुदान पर चली कैंची, कलाकारों पर आर्थिक वार

कोरोना संकट के बीच आर्थिक तंगी से जूझते कलाकारों पर संस्कृति संचालनालय ने दोहरी मार की है। कला संस्थाओं को जारी की जाने वाली अनुदान की राशि में बड़ी में कई तरह की विसंगतियां इस बार सामने आई है। शहर की 12 से अधिक संस्थाओं को इस बार अनुदान की राशि ही स्वीकृत नहीं की गई। जिससे इन संस्थाओं से जुड़े 100 से अधिक कलाकारों पर अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक वार हुआ है। वहीं 6 संस्थाओं के अनुदान में भी कटौती की गई है। इसके अलावा 10 से ज्यादा ऐसी भी संस्थाएं हैं, जिन्हें आवेदन करने के बावजूद न तो कोई राशि दी गई और न ही अनुदान सूची में उनकी संस्थाओं के नामों का उल्लेख किया गया।
लॉकडाउन की वजह से मार्च से ही रंगमंच सूने पड़े हुए हैं। इसके अलावा अगले कुछ महीनों तक भी कलाकारों के पास कोई काम नहीं है। ऐसी स्थिति में अनुदान की राशि से कलाकारों को बड़ी उम्मीद थी लेकिन संस्कृति संचालनालय ने मनमाने तरीके से अनुदान की राशि पर अपनी कैंची चला दी। इससे शहर के कलाकारों पर आर्थिक संकट और भी अधिक गहरा गया है। वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए संचानालय ने प्रदेश की कुल 255 संस्थाओं को 2 करोड़ 18 लाख 3 हजार रुपए की राशि स्वीकृत की है। यह बीते वर्ष से अधिक है लेकिन इसके बावजूद शहर की कई संस्थाओं को या तो अनुदान की राशि ही नहीं दी गई या उनकी राशि में से कटौती कर दी गई। वहीं कुछ संस्थाओं को हजारों-लाखों रुपए की राशि स्वीकृत कर दी। जिससे शहर के कलाकारों में भी संचालनालय के प्रति नाराजगी है।

उज्जैन की संस्थाओं को इतना अनुदान हुआ स्वीकृत
संस्था-समिति का नाम 2019-20 में अनुदान 2018-19 में अनुदान
मप्र दलित साहित्य अकादमी 50 हजार रुपए 55 हजार रुपए
अभिवन रंगमंडल समिति 1.50 लाख रुपए 2 लाख रुपए
अभा टेपा सम्मेलन समिति 7.50 लाख रुपए नहीं
कला चौपाल शैक्ष. एवं सांस्कृतिक सामा. समिति 25 हजार रुपए 10 हजार रुपए
युग निर्माण शिक्षण समिति 45 हजार रुपए नहीं
भास सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थान 65 हजार रुपए 1 लाख रुपए
ठहाका सम्मेलन आयोजन समिति 5 लाख रुपए नहीं
मालव लोक कला केंद्र 60 हजार रुपए 1.60 लाख रुपए
कल्चरल एंड एजुकेशन सोसायटी 40 हजार रुपए नहीं
अदिति सुरछैया संस्था 50 हजार रुपए 1 लाख रुपए
रंग उत्सव नाट्य शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान समिति 1 लाख रुपए नहीं
शिप्रा संस्कृति संस्थान 1 लाख रुपए नहीं
पूर्वागिरि सांस्कृतिक अकादमी 65 हजार रुपए नहीं
लोक गुंजन देवांजलि नहीं 35 हजार रुपए
प्रतिकल्पा सांस्कृतिक संस्था नहीं 1 लाख रुपए
गोथरवाल शिक्षण समिति नहीं 35 हजार रुपए
माइम एजुकेशन सोसायटी नहीं 25 हजार रुपए
मप्र नाटक लोक कला अकादमी नहीं 65 हजार रुपए
डॉ. भीमराव अंबेडकर सा.सां. शै. एवं सामा. समिति नहीं 1.50 लाख रुपए

ठहाका और टेपा को 5 से 7.5 लाख रुपए का अनुदान

2019-20 के लिए अशासकीय संस्थाओं को स्वीकृत किए अनुदान में शहर के दो बड़े कार्यक्रमों को आयोजित करने वाली समितियों के नाम भी शामिल हैं। इन्हें स्वीकृत किए अनुदान राशि भी चौंकाने वाली है। टेपा सम्मेलन समिति को 7 लाख 50 हजार की राशि स्वीकृत की है, जो कि शहर की किसी भी संस्था को स्वीकृत की राशि की तुलना में सबसे अधिक है। वहीं दूसरी तरफ ठहाका सम्मेलन आयोजन समिति को 5 लाख रुपए की अनुदान राशि स्वीकृत की है। जबकि ठहाका सम्मेलन के दौरान रुपए लेकर पास बेचने के भी खुलासे हुए हैं। खास बात यह है कि यह समितियां वर्ष में केवल एक ही प्रमुख आयोजन करती है। जबकि अन्य रंग संस्थाएं लगातार पूरे वर्ष सांस्कृतिक गतिविधियां करवाती हैं।

कलाकार बोले - आवेदन के बावजूद नहीं मिल रहा अनुदान

संस्था संवाद क्रिएटिव कम्युनिकेशन की ओर से एक वर्ष में औसत 5 से 7 नाटक होते हैं। चार वर्षों से मंगल मूर्ति महोत्सव रखा जाता है। रंगकर्मी एवं संस्था संवाद के नंदन चावड़ा ने बताया दो साल से हम अनुदान के लिए संचालनालय को आवेदन कर रहे हैं। दो साल से कोई अनुदान नहीं दिया गया। बगैर किसी पैमाने के इक्का-दुक्का आयोजन करने वाली संस्थाओं को लाखों रुपए जारी कर दिए जाते हैं। वहीं प्रतिभा परख नाट्य मंच शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान की ओर से दो दिनी नाट्य समारोह प्रति वर्ष रखा जाता है। वरिष्ठ रंगकर्मी एवं संस्थान के प्रमुख पंकज आचार्य ने बताया दो साल से अनुदान की राशि नहीं मिली। इस बार भी अनुदान स्वीकृत नहीं किया। रंगकर्मियों के साथ यह अंतर क्यों है, समझ से परे है।






Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2ZXOtYg

No comments:

Post a Comment

Kusal Perera ruled out of India series due to injury: Report

from The Indian Express https://ift.tt/3rf5BoA