बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए एक सप्ताह में दूसरी बार चिकित्सा शिक्षा आयुक्त निशांत बरबड़े सागर आए थे। इस दौरान उन्होंने पहले जिला प्रशासन के अफसरों की बैठक लेकर किल कोरोना अभियान की समीक्षा की और इसके बाद बीएमसी पहुंचे। जहां उन्हें डॉक्टर कैजुअल्टी से फीवर क्लीनिक ले गए।
इस पर आयुक्त बरबड़े ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब मुझे सीधे फीवर क्लीनिक जाना था तो कैजुअल्टी के रास्ते क्यों लाया गया। मरीज के साथ भी ऐसा ही होगा। फीवर क्लीनिक जाने के लिए मरीज का रास्ता कौन बताएगा। इसके बाद उन्होंने फीवर क्लीनिक के लिए साइन बोेर्ड और गेट पर हर मरीज की स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए। इसके बाद वे डीन ऑफिस पहुंचे जहां उन्होंने ढाना में बगैर सैंपलिंग रिपोर्ट के मृत हुई पॉजिटिव की मां के संबंध में अफसरों से सवाल जवाब किया और अन्य मौतों का भी हिसाब मांगा। इस दौरान आयुक्त के समक्ष पीपीई किट की कमी और डॉक्टरों की भर्ती को लेकर प्रस्ताव रखा गया। जिस पर आयुक्त ने पीपीई किट का ब्यौरा और मेडिकल ऑफिसरों की भर्ती बुधवार से शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान कमिश्नर जेके जैन, कलेक्टर दीपक सिंह, बीएमसी डीन डॉ. आरएस वर्मा, अधीक्षक डॉ. राजेश जैन, डॉ. रमेश पांडे, डॉ. मनीष जैन और डॉ. शैलेंद्र पटेल आदि मौजूद थे।
सिविल लाइन पहुंचकर देखा दल के सर्वे करने का तरीका
किल कोरोना अभियान की समीक्षा करते हुए पहले आयुक्त निशांत बरबड़े ने अफसरों की बैठक ली और आंकड़ों की समीक्षा की। उन्होंने सर्वे में सारी और आईएलआई के मरीजों की संख्या, संदिग्ध मरीजों की सैम्पलिंग आदि के बारे में जानकारी ली। इसके बाद मलेरिया और डेंगू आदि की रोकथाम के लिए लार्वा सर्वे और बीएमसी में ओपीडी व आईपीडी के मरीजों की जानकारी प्रतिदिन लेने के निर्देश दिए। वहीं सर्वे दल का तरीका देखने के लिए आयुक्त सिविल लाइन पहुंचे। जहां टीम के पूछताछ करने का तरीका देखा और स्क्रीनिंग में इस्तेमाल हो रहे थर्मल मीटर और पल्स ऑक्सीमीटर चैक किए। आयुक्त ने सार्थक एप पर एंट्री करने के तरीके की तारीफ भी की। इस दौरान नगर निगम आयुक्त आरपी अहिरवार, सीएमएचओ डॉ.एमएस सागर, महिला एवं बाल विकास विभाग अधिकारी भरत सिंह राजपूत आदि मौजूद थे।
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