खरीफ फसलों को नुकसानी से बचाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक व कृषि विभाग अधिकारी गांव-गांव घूमकर किसानों की फसलों का मुआयना कर रहे हैं। कृषि उपसंचालक जीएस मोहनिया ने बताया मंगलवार को मैदानी अमले ने जावरा ब्लॉक के गांव रिंगनोद, मरम्या, कुम्हारी, असावती, पिपलाैदा ब्लॉक के गांव मचून, मावता, रानीगांव, माउखेड़ी, आलोट ब्लॉक के गांव लूनी,नारायणगढ, देवगढ़, रजला, धतुरिया में पहुंचकर किसान के खेतों में खड़ी सोयाबीन व उड़द फसलों का अवलोकन किया। फसलों में व्हाइट फ्लाई, स्टेम फ्लाई, तंबाकू की इल्ली आदि कीट का प्रकोप सामने आया। इसकी रोकथाम के लिए बीटासाइफ्लुथ्रिन 8.49% व इमिडाक्लोप्रिड 19.81%(350 मिली प्रति हेक्टेयर) या थायोमिथाक्सम व लेम्डासायहेलोथ्रिन(125 मिली दवा प्रति हेक्टेयर) 1.25 से 1.5 मिली दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह किसानों को दी। वहीं सोयाबीन, उड़द फसल पर एंथ्रेकनोज, पीला मोजेक, झुलसन आदि बीमारी मिली, जिसे रोकने के लिए टेबुकोनाजोल और सल्फर की 2.5 ग्राम प्रतिलीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फसल बीमा कराने की आखिरी तारीख 31 अगस्त है। जो किसान वंचित हैं वे अपना फसल बीमा करा सकते हैं।
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