स्थानीय जगदीश मंदिर प्रांगण में 60 वर्षों में पहली बार रक्षाबंधन पर सामूहिक उपाकर्म नहीं किया गया। कोरोना संक्रमण के चलते ब्रह्म समुदाय ने घर पर ही श्रावणी उपाकर्म की विधि पूरी की।
प्रति वर्ष रक्षा बंधन पर प्रात: ब्रह्म समुदाय के लोग जगदीश मंदिर पर एकत्रित होकर नवीन जनेऊ धारण करते हैं। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। पंडित विश्वनाथ शुक्ल व कार्यक्रम स्थल व्यवस्थापक सुशील पंडा ने बताया सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे इसके लिए यह निर्णय लिया गया था। मंदिर जाने की बजाए घर पर ही समस्त विधियां संपन्न की गई।
पं. शुक्ल ने बताया घर पर भी पूरी विधि-विधान से श्रावणी उपाकर्म किया गया। जिन लोगों को विधि नहीं आती थी उन्होंने फोन पर भी समझाइश दी गई।
गायत्री परिवार के सदस्यों ने सोमवार प्रात: अनास नदी के तट पर श्रावणी उपाकर्म किया। सबसे पहले हेमाद्र संकल्प, तीर्थ आह्वान, षटकर्म किया गया। इसके बाद दश स्नान हुआ। जिसमें भस्म मृतिका, गोमय, गोमूत्र, दूध आदि से स्नान किया। एसएस पुरोहित, अरुण अरोड़ा, दिनेश डांगी, लुणाजी गोयल, प्रशांत मलिक, नीलेश पुरोहित मौजूद थे। संचालन विनोद जायसवाल ने किया। सभी ने गायत्री शक्तिपीठ बसंत कॉलोनी पहुंचकर गायत्री यज्ञ में आहुतियां डाली।
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