पंजाब नेशनल बैंक की जवाहर मार्ग शाखा के अधिकारियों का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। एक जमीन का फर्जी डायवर्शन आदेश, नगर व ग्राम निवेश से फर्जी नक्शा पास होने के दस्तावेज लगाकर 1 करोड़ 70 लाख रुपए से ज्यादा का लोन जारी कर दिया। लोन लेने वाली फर्म से लेकर बैंक के अधिकारी-कर्मचारी भी इसमें लिप्त थे। ईओडब्ल्यू इंदौर के एसपी धनंजय शाह के मुताबिक बैंक प्रबंधक नंदकिशोर सिंह ने शिकायत की थी।
श्रीराम इंटर प्राइजेस के मालिक शिलादित्य सिंह चौहान पिता जयप्रकाशसिंह चौहान ने ऑटो पार्ट्स के व्यापार के लिए लोन का आवेदन किया था। लोन के एवज में एक जमीन गिरवी रखी गई थी। जमीन का नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से नक्शा पास होने, डायवर्शन किए जाने के दस्तावेज लगाए थे। नियमानुसार बैंक के अफसरों को दस्तावेजों की जांच करना थी, लेकिन इसके बगैर ही दस्तावेजों को सही मान लिया गया और लोन मंजूर कर दिया। शिलादित्य सिंह ने भैरवलाल प्रजापति से जमीन खरीदना बताते हुए रजिस्ट्री पेश की। जमीन की असल कीमत 29 लाख 64 हजार रुपए थी, लेकिन बैंक प्रोसेसिंग अधिकारी ब्रजेश पुलैया ने इसकी पुष्टि नहीं की।
जमीन का मूल्यांकन करने वाले वीएस मेहता ने 2 करोड़ 30 लाख 58 हजार रुपए की रिपोर्ट बनाकर पेश की। इसे पुलैया ने सही मान लिया। तत्कालीन बैंक मैनेजर मनोहर वाधवानी की भी इसमें मिलीभगत थी। उसने मूल्यांकन रिपोर्ट के साथ अन्य दस्तावेजों को भी सही मानकर लोन मंजूर कर दिया। वाधवानी ने गिरवी संपत्ति की सार्वजनिक सूचना भी जानबूझकर सार्वजनिक नहीं की। जांच अधिकारी केसी पाटीदार ने वाधवानी, पुलैया, प्रजापति, मेहता व शिलादित्यसिंह को आरोपी मानते हुए केस दर्ज करने की अनुशंसा एसपी से की थी।
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