लगातार लापरवाही एवं कर्मचारियाें की हड़ताल के कारण कचरा कलेक्शन में फिसड्डी रहने वाली ईको ग्रीन कंपनी ने अब शहर के 66 वार्डों से कचरा कलेक्शन करने की इच्छा जताई है। कंपनी की शर्त है कि इस बार वह कचरे से बिजली नहीं बनाएगी। इस शर्त के कारण नगर निगम ने फैसला नगरीय विकास एवं आवास विभाग पर छाेड़ दिया है, क्याेंकि अनुबंध के विपरीत निगम फैसला नहीं हाे सकता है। इसके लिए कैबिनेट की सहमति की जरूरत हाेगी। कंपनी हर महीने 70 फीसदी भुगतान भी चाहती है।
गाैरतलब है कि कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के कड़े रुख के बाद नगर निगम ने 18 अक्टूबर को ईको ग्रीन कंपनी के वाहनों और कर्मचारियों को अधिग्रहित कर लिया था, लेकिन निगम सफाई व्यवस्था नहीं संभाल पाई। अब निगम के कुछ अफसर नहीं चाहते हैं कि कंपनी निगम में फिर से वापसी करे। इसके लिए शनिवार को स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में संभागायुक्त एवं प्रशासक आशीष सक्सेना, निगम आयुक्त संदीप माकिन, नोडल अधिकारी श्रीकांत काटे की मौजूदगी में बैठक रखी गई। इसमें ईको ग्रीन कंपनी के डिप्टी सीईओ संजय शर्मा, डायरेक्टर फाइनेंस जोगेश जग्गा और कंपनी के वकील एवं प्रोजेक्ट हेड आकर्ष दत्त शर्मा शामिल हुए।
कंपनी बिजली बनाने को तैयार नहीं
ईको ग्रीन कंपनी काम करने को तैयार हैं, लेकिन कचरे से बिजली बनाने को तैयार नहीं है। अब फैसला भोपाल में वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष ही हो सकेगा।
-संदीप माकिन, आयुक्त, नगर निगम
भुगतान 40 की जगह 70 फीसदी चाहते हैं
कंपनी को हर महीने कटौती के बाद 40% भुगतान होता है। हम चाहते हैं कि 70% कर दिया जाए। चूंकि 650 टन कचरा नहीं मिल रहा है। ऐसे में बिजली प्लांट लगाना मुश्किल है।
-संजय शर्मा, डिप्टी सीईओ, ईको ग्रीन कंपनी
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