(वंदना श्राेती) भगवान ऐसे बेटेे-बहू किसी को न दे। जिस उम्र में लोग भगवान को भजते हैं उस उम्र में सम्मान पूर्वक जिंदगी जीने के लिए कोर्ट के चक्कर काटना पड़ रहा है। यह पीड़ा है 99 वर्ष की उस मां की जिसके 4 बेटे-बहुओं ने उसे दर-ब-दर का कर दिया है। बुजुर्ग के नाम 7-8 एकड़ खेती और मकान भी है, लेकिन बेटों ने हड़प लिया।
इस मां के दो बेटे सरकारी नौकरी में है और दो खेती किसानी कर रहे हैं। बुजुर्ग मां का कहना है कि मरना और जीना तो भगवान के हाथों में है। लेकिन तब बहुत बुरा लगता है कि जब बेटे-बहू ताने मारते हैं, कहते हैं- मर क्यों नहीं जाती ताकि पिंड छूटे।
बेटा और बहूओं के द्वारा प्रताड़ित किए जाने पर 99 साल की बुजुर्ग महिला ने उनके खिलाफ घरेलू हिंसा और भरण-पोषण के लिए जिला कोर्ट में अर्जी लगाई है। बुजुर्ग मां ने पांच लाख रुपए के अलावा 20 हजार रुपए हर माह देने और पैतृक मकान में सम्मानपूर्वक रहने का अधिकार दिलाने की बात कही है। यह मामला जज आशीष परसाई की कोर्ट में विचाराधीन है। यह पहला मौका है इतनी उम्रदराज महिला ने घरेलू हिंसा व भरण-पोषण की अर्जी कोर्ट में लगाई है।
घर से निकालने के बाद बेटों ने दी धमकी- वापस आई तो जान से मार देंगे
अशोकनगर निवासी 99 साल की बुजुर्ग महिला की सात संतानों में से बड़े बेटे की मौत हो चुकी है। बेटी की शादी कर दी। छोटा बेटा दिव्यांग है और इसी वजह से उसने शादी नहीं की। बाकी के चार बेटों ने उसकी संपत्ति पर कब्जा कर लिया है। बुजुर्ग महिला ने अपने बेटे-बहू, पोते सहित अन्य के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज, संपत्ति हड़पने और घर से निकाले जाने के आरोप लगाए हैं। बुजुर्ग ने बताया कि 2001 में पति की मौत के बाद अशोक नगर में मझले बेटे के साथ रह रही थी।
धीरे-धीरे बेटे-बहू ने मकान, कृषि भूमि और सोने-चांदी के आभूषणों पर अपना कब्जा कर लिया। दूसरे बेटों ने इसलिए विरोध नहीं किया कि जैसे भी हो मां को रख तो रहे हैं। धीरे-धीरे बेटे और बहुओं का व्यवहार बदलने लगा। दूसरे बेटे भी रखने तैयार नहीं थे। दो माह पहले उन्हें यह कहकर घर से बाहर निकाल दिया गया कि अब आई तो जान से मार देंगे। यह बात जब भोपाल में रह रहे दिव्यांग बेटे को लगी तो वह अपने साथ भोपाल ले आया। चूंकि वह खुद लाचार है।
पति की बंदूक का लाइसेंस किया जाए रद्द
बुजुर्ग महिला ने अर्जी में एक बात कही है कि उनके पति के नाम बंदूक थी। जिसे चुपके से पोते ने अपने नाम करा ली। उस बंदूक का लाइसेंस भी रद्द किया जाए।
दो दिन सड़क पर कराहती रहीं, लेकिन नहीं ली सुध
बुजुर्ग महिला के वकील महेंद्र वर्मा ने बताया कि उनके बेटे-बहू ने कई तरह से उन्हें प्रताड़ित करते हैं। वह शुगर एवं बीपी की बीमारी ग्रसित है। बहू बेटों ने उनका इलाज कराने से मना कर दिया। उन्हें फ्रेक्चर हो गया था तो कोई उन्हें अस्पताल नहीं ले गया।
वह दर्द से कराहती रहीं, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। उन्हें घर से निकाल दिया गया तो वह दो दिन सड़क पर पड़ी रही। किसी तरह सबसे छोटे बेटे को जानकारी मिली जिसके बाद वह मां को अपने साथ भोपाल ले आया। उसने बड़े भाई से बात करने की कोशिश की, लेकिन उसे भी भगा दिया गया।
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